इंसानों के साथ चांद की ओर रवाना होगा आर्टिमिस-II मिशन

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (14/01/2026): 1972 के बाद नासा पहली बार इंसानों को फिर से चांद पर भेजने की तैयारी कर रहा है। आर्टिमिस II (Artemis II) मिशन एक तरह का टेस्ट है, जिससे यह पता चलेगा कि क्या हम दोबारा चांद पर कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह इस प्रोग्राम का पहला ऐसा मिशन है जिसमें इंसान जा रहे हैं। यह मिशन पिछले बिना इंसानों वाले मिशन और भविष्य में चांद पर उतरने वाले मिशन के बीच एक बहुत जरूरी कदम है।”

आर्टिमिस II मिशन लगभग 10 दिनों का होगा। इसका असली मकसद यह देखना है कि हमारी नई स्पेस टेक्नोलॉजी और इंसान अंतरिक्ष की मुश्किलों को कितनी अच्छी तरह झेल सकते हैं। यह मिशन एक बड़े टेस्ट की तरह है, जिससे पता चलेगा कि क्या हमारी तैयारी भविष्य के लंबे सफर के लिए पक्की है।

इस मिशन के दो मुख्य काम हैं एक तो दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट और ओरियन स्पेसशिप की जांच करना। इंजीनियर यह करीब से देखेंगे कि क्या स्पेसशिप के अंदर हवा-पानी, लाइफ सपोर्ट, रास्ता दिखाने वाला सिस्टम यानी नेविगेशन और उसे चलाने वाले कंट्रोल सही से काम कर रहे हैं। यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि आगे चलकर अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा पक्की हो सके।

इस सफर पर कुल चार अंतरिक्ष यात्री जा रहे हैं, जो अमेरिका और कनाडा के हैं। टीम की कमान रीड वाइसमैन संभालेंगे, विक्टर ग्लोवर पायलट होंगे, और क्रिस्टीना कोच के साथ कनाडा के जेरेमी हैनसन मिशन एक्सपर्ट के तौर पर जाएंगे। यह पूरी टीम मिलकर एक साथ काम करेगी ताकि मिशन के हर टेक्निकल हिस्से को परखा जा सके।

दिलचस्प बात यह है कि यह मिशन चांद पर उतरेगा नहीं। स्पेसशिप पहले पृथ्वी के दो चक्कर लगाएगा और फिर चांद के पीछे से होकर गुजरेगा। वापसी में यह चांद की ग्रेविटी का इस्तेमाल एक ‘गुलेल’ की तरह करेगा, जिससे बिना इंजन चलाए यह अपने आप पृथ्वी की ओर मुड़ जाएगा। आखिर में, यह स्पेसशिप पैराशूट की मदद से प्रशांत महासागर में सुरक्षित गिर जाएगा, जिसे ‘स्पलैशडाउन’ कहते हैं।

अगर आर्टिमिस II मिशन कामयाब हो जाता है, तो इसके बाद अगला बड़ा कदम आर्टिमिस III होगा। इसी मिशन के जरिए पहली बार इंसानों को चांद के साउथ पोल पर उतारा जाएगा। अभी नासा इसकी आखिरी तैयारियों में जुटा है और उन्होंने लक्ष्य रखा है कि इसे फरवरी 2026 की शुरुआत में फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाए। यह मिशन सिर्फ अंतरिक्ष में एक सैर नहीं है, बल्कि यह हमारी मशीनों और सिस्टम्स का सबसे बड़ा इम्तिहान है। अगर हम इसमें पास हो गए, तो भविष्य में इंसान चांद पर लंबे समय तक रह सकेंगे और वहाँ से आगे दूसरे ग्रहों, जैसे मंगल तक पहुँचने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।

डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥


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