कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान, 2.56 लाख ग्राम सभाओं के प्रस्तावों पर फोकस
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (10 January 2026): कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना वीबीजीरामजी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया है। पार्टी 8 जनवरी से 10 फरवरी 2026 तक ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान चला रही है, जिसके तहत देशभर की करीब 2.56 लाख ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित कराए जाएंगे। इन प्रस्तावों के जरिए कांग्रेस पुराने मनरेगा कानून को बहाल करने और नई योजना को वापस लेने की मांग को गांव-गांव तक पहुंचाना चाहती है।
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने नई योजना के जरिए ग्राम पंचायतों की शक्तियों को कमजोर कर दिया है। पार्टी का कहना है कि मनरेगा के तहत पहले ग्राम पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के आधार पर काम तय करने और मजदूरों को काम देने का अधिकार था, लेकिन अब यह अधिकार केंद्र सरकार के हाथ में चला गया है। इससे ग्रामीण गरीबों का जरूरत पड़ने पर काम मांगने का संवैधानिक अधिकार छिन गया है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, एआईसीसी ने सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि वे विरोध प्रदर्शनों को गांवों तक ले जाएं। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य 2.5 लाख से अधिक ग्राम सभाओं से प्रस्ताव पास कराना है, ताकि केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सके। कांग्रेस का मानना है कि ग्राम सभाओं से उठने वाली आवाज पूरे देश में एक मजबूत राजनीतिक संदेश देगी।
राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के चेयरमैन सुनील पंवार ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता लगभग हर गांव में मौजूद हैं और करीब 22 करोड़ मनरेगा मजदूरों से संपर्क किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा काम का अधिकार था, जबकि वीबीजीरामजी एक ऐसी योजना है जो पंचायतों की भूमिका को सीमित करती है। कांग्रेस का दावा है कि यह लंबे समय बाद मजदूरों का सबसे बड़ा देशव्यापी आंदोलन होगा।
कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में मनरेगा को लेकर विरोध तेज कर दिया है। विधानसभा घेराव से लेकर पंचायत स्तर तक पहुंचने की रणनीति बनाई गई है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संसद के पिछले शीतकालीन सत्र में पुराने कानून को नई योजना में बदलने और महात्मा गांधी का नाम हटाने के फैसले से पार्टी हाईकमान नाराज था। इसी के बाद 27 दिसंबर 2025 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में इस अभियान को मंजूरी दी गई।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए एआईसीसी ने राज्य इकाइयों के साथ एक विस्तृत डॉक्यूमेंट भी साझा किया है। इसमें विरोध के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों की सूची दी गई है। पार्टी ने निर्देश दिए हैं कि इस सामग्री का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद कर ग्रामीण इलाकों में व्यापक प्रचार किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग बदले हुए ग्रामीण रोजगार कानून को समझ सकें।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य जगदीश ठाकोर का कहना है कि नई योजना विकेंद्रीकरण की भावना के खिलाफ है। उनके मुताबिक, अब फंड, काम और संपत्ति से जुड़े सभी फैसले केंद्र सरकार लेगी, जिससे कई पंचायतों को जीरो फंड की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इससे स्थानीय योजना बनाने की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी और पंचायतें सिर्फ केंद्र की योजनाओं को लागू करने तक सीमित रह जाएंगी।
वहीं, कांग्रेस नेता कमलेश्वर पटेल ने कहा कि मनरेगा देश की सबसे सफल मांग-आधारित ग्रामीण रोजगार योजनाओं में से एक रही है, जिसने गरीबी घटाने, पलायन रोकने और महिलाओं को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनका आरोप है कि नई योजना में काम मांगने का अधिकार खत्म हो गया है और यह संवैधानिक गारंटी को सरकारी इजाजत में बदल देती है। कांग्रेस का कहना है कि इसी वजह से ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान को वह एक हाई-इम्पैक्ट जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ा रही है।।
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