भारत में पहली बार होगी जातिगत जनगणना, क्या है केंद्र सरकार का पूरा प्लान?
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (09 January 2026): भारत में जनसंख्या आंकड़ों के इतिहास में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 के पहले चरण के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इससे पहले केंद्रीय कैबिनेट ने इस महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए ₹11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी थी। यह जनगणना कई मायनों में खास मानी जा रही है, क्योंकि आज़ादी के बाद पहली बार इसमें सभी जातियों की गणना शामिल की गई है। सरकार का मानना है कि इससे देश की सामाजिक और आर्थिक नीतियों को नई दिशा मिलेगी। यह जनगणना भारत की अब तक की सबसे आधुनिक और व्यापक जनगणना होगी।
जनगणना-2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जाएगा। इस चरण में घर-घर जाकर मकानों और परिवारों की सूची तैयार की जाएगी, जिसे हाउस लिस्टिंग कहा जाता है। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को अपने क्षेत्र में यह प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करनी होगी। इस चरण का उद्देश्य दूसरे चरण में होने वाली वास्तविक जनसंख्या गणना के लिए मजबूत आधार तैयार करना है। सरकार ने साफ किया है कि इस बार जनगणना में तकनीक की भूमिका बेहद अहम होगी। इससे आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।
पहले चरण में हर मकान और परिवार से जुड़ी बुनियादी जानकारी एकत्र की जाएगी। इसमें यह दर्ज होगा कि मकान पक्का है या कच्चा, घर में कितने लोग रहते हैं, बिजली, पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। इसके साथ ही हर घर का जियो-टैगिंग के जरिए भौगोलिक स्थान दर्ज किया जाएगा। इसी प्रक्रिया के तहत हर मकान को ‘डिजी डॉट’ के रूप में डिजिटल मैप पर चिह्नित किया जाएगा। इससे देश का सबसे सटीक जनसंख्या और आवास नक्शा तैयार किया जा सकेगा। यह डेटा आगे चलकर नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।
सरकार ने इस बार Self Enumeration यानी स्वयं-गणना की सुविधा भी उपलब्ध कराने का फैसला किया है। घर-घर सर्वे शुरू होने से करीब 15 दिन पहले नागरिकों को डिजिटल पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए अपनी जानकारी खुद भरने का विकल्प मिलेगा। इससे जनगणना प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और समय की भी बचत होगी। अधिकारियों का कहना है कि स्वयं-गणना से डेटा की शुद्धता बेहतर होगी और फील्ड कर्मचारियों पर काम का दबाव भी कम होगा। डिजिटल प्रक्रिया होने के कारण किसी भी त्रुटि को तुरंत सुधारा जा सकेगा। यह व्यवस्था खास तौर पर शहरी इलाकों में कारगर साबित होने की उम्मीद है।
जनगणना-2027 पूरी तरह डिजिटल होगी और करीब 30 लाख कर्मचारी इस प्रक्रिया में शामिल होंगे। ये सभी कर्मचारी Android और iOS आधारित मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्र करेंगे। पूरी प्रक्रिया पेपरलेस होगी और जानकारी रियल-टाइम में केंद्रीय सर्वर पर सुरक्षित रूप से स्टोर की जाएगी। इससे डेटा लीक होने की आशंका भी कम होगी। सरकार का दावा है कि यह भारत की प्रशासनिक क्षमता में एक ऐतिहासिक तकनीकी छलांग है। डिजिटल जनगणना से समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी।
इस जनगणना की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक खासियत यह है कि आज़ादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना की जा रही है। ब्रिटिश शासन के दौरान 1881 से 1931 तक जाति की गणना होती रही थी, लेकिन 1931 आखिरी पूर्ण जातिगत जनगणना थी। 1951 के बाद से जनगणना में केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गिनती होती रही, जबकि अन्य जातियों का डेटा उपलब्ध नहीं हो सका। 2011 में सामाजिक-आर्थिक सर्वे हुआ था, लेकिन उसे आधिकारिक जातिगत जनगणना का दर्जा नहीं मिला। अब 2027 में सभी जातियों का डिजिटल और आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि जातिगत जनगणना से गरीब, वंचित और उपेक्षित वर्गों की सही पहचान संभव हो सकेगी। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा। आरक्षण नीति की समीक्षा, सामाजिक न्याय से जुड़ी योजनाएं और आर्थिक नीतियां डेटा के आधार पर अधिक सटीक बनाई जा सकेंगी। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसी योजनाओं की बेहतर मैपिंग भी संभव होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक यह सामाजिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
‘डिजी डॉट’ और डिजिटल मैपिंग प्रणाली के जरिए जनगणना के कई दीर्घकालिक फायदे भी सामने आएंगे। आपदा के समय यह पता लगाना आसान होगा कि किस इलाके में कितने लोग रहते हैं और राहत सामग्री कितनी चाहिए। परिसीमन प्रक्रिया में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का संतुलन बेहतर होगा। शहरी नियोजन, स्कूल-अस्पताल निर्माण, पलायन के रुझान और मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हटाने में भी यह डेटा बेहद उपयोगी साबित होगा। कोरोना महामारी के कारण टली जनगणना अब 2027 में पूरी होने के बाद देश के विकास की योजनाओं को नई दिशा देने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।।
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