कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’: 10 जनवरी से 25 फरवरी तक देशव्यापी आंदोलन

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (04 जनवरी 2026): कांग्रेस ने मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए 10 जनवरी से 25 फरवरी तक देशभर में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चलाने का ऐलान किया है। पार्टी ने वीबी-ग्राम-जी कानून को वापस लेने, मनरेगा को फिर से अधिकार आधारित कानून बनाने, काम के अधिकार और पंचायतों के अधिकार बहाल करने की मांग दोहराई है।

कांग्रेस मुख्यालय में 3 जनवरी 2026 को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने आंदोलन के कार्यक्रम की जानकारी दी। नेताओं ने नए कानून को गरीबी उन्मूलन की सबसे सफल योजना मनरेगा को खत्म करने की “सोची-समझी साजिश” बताया।

केसी वेणुगोपाल ने कहा कि मनरेगा एक मांग-आधारित योजना थी, जिसने हर साल 5–6 करोड़ ग्रामीण परिवारों को संकट के समय सुरक्षा दी। नए कानून में रोजगार अधिकार नहीं रह गया, बल्कि सरकार की इच्छा पर निर्भर हो गया है। पहले ग्राम सभाएं और पंचायतें स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजना बनाती थीं, अब फैसले दिल्ली से होंगे और पंचायतें सिर्फ औपचारिक भूमिका में रह जाएंगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि केवल केंद्र द्वारा अधिसूचित पंचायतों को ही काम और फंड मिलेगा, जिससे कई क्षेत्रों में काम ठप होगा और 73वें संविधान संशोधन की भावना को ठेस पहुंचेगी। नए प्रावधानों में बजट सीमा तय होने से फंड खत्म होते ही काम रुक सकता है। महंगाई से जुड़ी मजदूरी की गारंटी भी खत्म कर दी गई है। कृषि के पीक सीजन में 60 दिन काम न मिलने का खतरा है।
वेणुगोपाल ने कहा कि बायोमेट्रिक प्रणाली को पारदर्शिता की जगह बहिष्करण का हथियार बनाया जा रहा है, जिससे गरीब और कम पढ़े-लिखे मजदूर बाहर हो सकते हैं। वीबी-ग्राम-जी कानून के तहत पंचायतें केंद्रीय ठेकेदारों के लिए केवल श्रम आपूर्तिकर्ता बन जाएंगी, ठेकेदारों की वापसी से भ्रष्टाचार बढ़ेगा। उन्होंने मजदूरी में केंद्र का हिस्सा 100% से घटाकर 60% करने और महात्मा गांधी का नाम हटाने की भी कड़ी आलोचना की।

आंदोलन का कार्यक्रम:

8 जनवरी: प्रदेश कांग्रेस मुख्यालयों में तैयारी बैठकें

10 जनवरी: जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस

11 जनवरी: जिला मुख्यालयों पर गांधी/आंबेडकर प्रतिमाओं के समक्ष एकदिवसीय उपवास

12–29 जनवरी: पंचायत स्तर पर चौपाल, जनसंपर्क, नुक्कड़ सभाएं व पर्चा वितरण

30 जनवरी (शहीदी दिवस): वार्ड व ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरना

31 जनवरी–6 फरवरी: जिला कलेक्ट्रेट/डीएम कार्यालयों पर धरना

7–15 फरवरी: राज्य स्तर पर विधानसभा/राजभवन घेराव

16–25 फरवरी: चार बड़ी क्षेत्रीय रैलियों के साथ समापन

जयराम रमेश ने कहा कि यह आंदोलन दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंचायत से राज्य स्तर तक चलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि नए कानून में न रोजगार की गारंटी है, न राज्यों को वित्तीय सहायता की। धन आवंटन, आधार और लाभार्थी पंचायतें—सब कुछ केंद्र तय करेगा।
उन्होंने केंद्र-राज्य वित्तीय हिस्सेदारी (60:40) को संविधान के अनुच्छेद 258 का उल्लंघन बताया और कहा कि इसे राज्यों की सहमति के बिना लागू किया गया है, जिसकी वैधता को अदालत में चुनौती दी जाएगी। जयराम रमेश ने याद दिलाया कि 2005 में मनरेगा सर्वसम्मति से पारित हुआ था। व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि नए कानून में ‘वीबी’ का अर्थ ‘विकसित भारत’ नहीं, बल्कि ‘विनाश भारत’ है और ‘जी’ का मतलब ‘केंद्रीकरण की गारंटी’।


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