National News (04 January 2026): भारत और वेनेजुएला के बीच द्विपक्षीय व्यापार में बीते कुछ वर्षों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2019-20 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 57,582 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जो उस समय एक मजबूत आर्थिक साझेदारी का संकेत था। हालांकि, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों का सीधा असर इस व्यापार पर पड़ा। इन प्रतिबंधों के चलते भारत को वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात में कटौती करनी पड़ी। परिणामस्वरूप 2020-21 में द्विपक्षीय व्यापार घटकर 11,440 करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट आगे भी जारी रही और 2021-22 में यह आंकड़ा 3,816 करोड़ रुपये तक आ गया। 2022-23 में मामूली बढ़त के साथ व्यापार 3,879 करोड़ रुपये पर सिमटा रहा।
कच्चे तेल पर टिकी आर्थिक निर्भरता
भारत और वेनेजुएला के व्यापारिक रिश्तों की सबसे अहम कड़ी कच्चा तेल रहा है। भारत मुख्य रूप से वेनेजुएला से केवल कच्चे तेल का ही आयात करता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में व्यापार लगभग नगण्य है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात कच्चा तेल भंडार है, जिससे वह वैश्विक ऊर्जा बाजार में रणनीतिक महत्व रखता है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से वेनेजुएला एक अहम साझेदार रहा है। जब अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण तेल आयात घटा, तो इसका असर सीधे भारत की ऊर्जा रणनीति पर पड़ा। इसके बावजूद भारत ने विकल्प तलाशते हुए अन्य देशों से आयात बढ़ाया। फिर भी वेनेजुएला का तेल भारत के लिए लंबे समय तक अहम बना रहा।
राजनीतिक रिश्तों का है पुराना आधार
भारत और वेनेजुएला के राजनीतिक रिश्ते लंबे समय से सौहार्दपूर्ण रहे हैं। वर्ष 2005 में तत्कालीन वेनेजुएलाई राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने भारत का दौरा किया था और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ द्विपक्षीय वार्ता की थी। यह दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक अहम पड़ाव माना जाता है। इसके बाद अगस्त 2012 में निकोलस मादुरो, उस समय विदेश मंत्री के रूप में, भारत आए थे। 2013 में ह्यूगो शावेज के निधन पर उनके अंतिम संस्कार में भारत की ओर से तत्कालीन कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री सचिन पायलट शामिल हुए थे। सितंबर 2016 में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने वेनेजुएला का दौरा किया। अगस्त 2023 में वेनेजुएला की कार्यकारी उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज भी भारत आई थीं, जिससे राजनीतिक संवाद जारी रहने का संकेत मिला।
तेल आयात में हालिया बढ़ोतरी और नए संकेत
हाल के वर्षों में भारत और वेनेजुएला के बीच तेल व्यापार में फिर से हलचल देखने को मिली है। द फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार, दिसंबर 2023 में भारत कुछ समय के लिए वेनेजुएला के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। आंकड़े बताते हैं कि 2024 में वेनेजुएला से भारत का औसत तेल आयात बढ़कर लगभग 63,000 से 1,00,000 बैरल प्रतिदिन हो गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 500 प्रतिशत की बढ़ोतरी थी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2025 के शुरुआती महीनों में भी भारत वेनेजुएला के तेल का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने व्यावहारिक जरूरतों के तहत तेल आयात को प्राथमिकता दी।
ऊर्जा संकट और भारत की अर्थव्यवस्था पर असर
वेनेजुएला में किसी भी तरह की राजनीतिक या सामाजिक उथल-पुथल का असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ सकता है। भारत के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि वह अपनी अधिकांश ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। तेल की कीमतों में मामूली वृद्धि भी भारत के चालू खाता घाटे को बढ़ा सकती है। इससे रुपये पर दबाव बन सकता है और महंगाई दर में इजाफा हो सकता है। खासतौर पर ऐसे समय में, जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं पहले से ही नाजुक बनी हुई हैं। ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता का सीधा असर आम उपभोक्ता से लेकर उद्योग जगत तक पड़ता है। इसलिए भारत वेनेजुएला की स्थिति को बेहद सतर्कता से देख रहा है।
कूटनीति के मोर्चे पर संतुलन की चुनौती
भारत के लिए वेनेजुएला का मुद्दा केवल आर्थिक या ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जटिल कूटनीतिक चुनौती भी है। एक ओर अमेरिका का वेनेजुएला के खिलाफ कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर भारत खुद को नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थक बताता रहा है। भारत ने ऐतिहासिक रूप से वेनेजुएला के साथ व्यावहारिक और संतुलित संबंध बनाए रखे हैं। साथ ही अमेरिका के साथ भी भारत के रणनीतिक रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। इसके अलावा वेनेजुएला को रूस और चीन जैसे देशों का समर्थन प्राप्त है, जो भारत के भी अहम साझेदार हैं। ऐसे में भारत को हर कदम बेहद संतुलन के साथ उठाना पड़ रहा है।
मौजूदा घटनाक्रम पर भारत का आधिकारिक रुख
अब तक वेनेजुएला में हो रहे ताजा घटनाक्रम पर भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने एहतियातन एक एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों से वेनेजुएला की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की गई है। मंत्रालय ने वहां मौजूद भारतीयों को सावधानी बरतने और अपनी आवाजाही सीमित रखने की सलाह दी है। साथ ही भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने को भी कहा गया है। यह रुख दर्शाता है कि भारत फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी संभावित जोखिम से अपने नागरिकों को सुरक्षित रखना चाहता है। आने वाले समय में भारत का कूटनीतिक और आर्थिक रुख इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभा सकता है।।
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