सिंगापुर क्यों कहलाता है दुनिया का सबसे सुरक्षित देश

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (04/01/2026): सिंगापुर की सुरक्षा का अंदाज़ा सार्वजनिक भरोसे के एक अनोखे उदाहरण से लगाया जा सकता है, जिसे वहां ‘चोप’ (Chope) कल्चर कहा जाता है। सिंगापुर के भीड़भाड़ वाले फूड कोर्ट में लोग अपनी टेबल बुक करने के लिए अपना महंगा स्मार्टफोन, बटुआ या लैपटॉप टेबल पर ही छोड़ देते हैं और खुद खाना लेने चले जाते हैं। यह वहां के सुरक्षित समाज की पहचान है, जहां 97% महिलाएं खुद को पूरी तरह सुरक्षित मानती हैं—जो दुनिया में सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह सुरक्षा हर वक्त रहती है; महिलाएं रात के 3 बजे भी बिना किसी डर के अकेले सड़क पर घूम सकती हैं या जॉगिंग कर सकती हैं। यह आजादी दुनिया के बाकी कई देशों के मुकाबले बहुत अलग और हैरान करने वाली है।

सिंगापुर के इतिहास पर नज़र डालें तो पता चलता है कि यह हमेशा से इतना सुरक्षित नहीं था। 1820 से 1960 के बीच यह शहर 360 से भी ज़्यादा खतरनाक अंडरवर्ल्ड गैंग्स का अड्डा हुआ करता था, जहाँ सरेआम कत्ल, अपहरण और नशे का कारोबार आम बात थी। हालात इतने डरावने थे कि स्कूली बच्चों तक को गैंग्स में भर्ती किया जाता था और उनके कपड़ों से उनकी गैंग की पहचान होती थी। लेकिन 1959 में पहले प्रधानमंत्री ली कुआन यू ने इन गैंग्स के खिलाफ सीधी जंग छेड़ दी; उन्होंने अपराधियों को सरेंडर करने के लिए 16 दिन की मोहलत दी और उसके बाद पुलिस को पूरी छूट देकर इन खूंखार अपराधियों का सफाया कर दिया, जिससे सिंगापुर के पूरी तरह बदलने की शुरुआत हुई।

सिंगापुर को सुरक्षित बनाने के लिए वहां के सख्त कानूनों और आधुनिक तकनीक ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। सरकार ने क्रिमिनल लॉ एक्ट (धारा 55) जैसे विवादास्पद कानून लागू किए, जिसने पुलिस को यह ताकत दी कि वे किसी भी संदिग्ध को बिना किसी अदालती मुकदमे के 12 महीनों तक हिरासत में रख सकते हैं, जिससे अपराधी कानूनी कमियों का फायदा नहीं उठा पाए।

आज सिंगापुर एक “तकनीकी किले” में तब्दील हो चुका है, जहाँ 90,000 से भी ज्यादा एआई-पावर्ड (AI-powered) कैमरों का जाल बिछा है। ये स्मार्ट कैमरे न सिर्फ चेहरा पहचान लेते हैं, बल्कि सड़क पर होने वाली किसी भी संदिग्ध हलचल या लड़ाई-झगड़े को तुरंत पकड़कर कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देते हैं, जिससे पुलिस पलक झपकते ही कार्रवाई कर पाती है।

सिंगापुर में नियमों को बहुत गंभीरता से लिया जाता है। अगर कोई दीवार पर कुछ लिखता है या तोड़फोड़ करता है, तो उसे जेल के साथ-साथ डंडों से पीटा भी जाता है। यहाँ छोटी-छोटी बातों, जैसे टॉयलेट साफ़ न रखने या सड़क पर थूकने पर भी हज़ारों रुपये का जुर्माना भरना पड़ता है। इन्हीं सख्त नियमों और भारी जुर्माने की वजह से लोग यहाँ गलती करने से डरते हैं और इसी वजह से इसे ‘जुर्मानों का शहर’ भी कहा जाता है।

सिंगापुर का एक झुग्गी-झोपड़ियों और गैंगवार वाले देश से दुनिया का सबसे ताकतवर और अमीर देश बनना, वहां की सख्त सुरक्षा का नतीजा है। वहां के लोगों ने पूरी आजादी के बदले सुरक्षित समाज को चुना। हालांकि कुछ लोग वहां के कानूनों को बहुत कठोर मानते हैं, लेकिन आज नतीजा सबके सामने है वहां लगभग हर किसी के पास अपना घर है और हत्या जैसे अपराध तो न के बराबर होते हैं। असली तरक्की सिर्फ ऊंची इमारतों या बड़ी सड़कों से नहीं आती। असली तरक्की वह है जहाँ देश का हर नागरिक, खासकर महिलाएं, बिना किसी डर के सड़क पर घूम सकें। सिंगापुर में सुरक्षा सिर्फ एक सोच नहीं, बल्कि सरकार की तरफ से दिया गया एक पक्का भरोसा है।

डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥


प्रिय पाठकों एवं दर्शकों, प्रतिदिन भारत सरकार , दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय एवं दिल्ली राजनीति ,   दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली नगर निगम, NDMC, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की ताजा एवं बड़ी खबरें पढ़ने के लिए hindi.tennews.in : राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल को विजिट करते रहे एवं अपनी ई मेल सबमिट कर सब्सक्राइब भी करे। विडियो न्यूज़ देखने के लिए TEN NEWS NATIONAL यूट्यूब चैनल को भी ज़रूर सब्सक्राइब करे।

टेन न्यूज हिंदी | Ten News English | New Delhi News | Greater Noida News | NOIDA News | Yamuna Expressway News | Jewar News | NOIDA Airport News.


Discover more from टेन न्यूज हिंदी

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

टिप्पणियाँ बंद हैं।