होम इंश्योरेंस क्लेम क्यों हो जाते हैं रिजेक्ट? घर को सुरक्षित रखने के लिए जानें जरूरी बातें
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (23/12/2025): भारतीय रियल एस्टेट बाजार में घर खरीदना जीवन की सबसे बड़ी जमापूंजी का निवेश माना जाता है। इस निवेश को सुरक्षित करने के लिए ‘होम इंश्योरेंस’ (Home Insurance) एक जरूरी कदम है। हालांकि, हालिया आंकड़ों और वित्तीय विशेषज्ञों की चेतावनियों से यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोग बीमा तो करवाते हैं, लेकिन सही जानकारी के अभाव में जरूरत के समय उनके क्लेम (दावे) रिजेक्ट हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ प्रीमियम भरना सुरक्षा की गारंटी नहीं है, बल्कि पॉलिसी की शर्तों को गहराई से समझना भी जरूरी है।
अक्सर देखा गया है कि लोग अपने घर का बीमा तो करवा लेते हैं, लेकिन वे बीमा की राशि (Sum Insured) का सही चुनाव नहीं करते। बहुत से लोग प्रीमियम के पैसे बचाने के चक्कर में अपने घर की कीमत कम दिखाते हैं। ऐसे में जब कोई बड़ा नुकसान होता है, तो कंपनियां ‘औसत नियम’ (Average Clause) लागू कर देती हैं। यानी पूरा पैसा देने के बजाय केवल उतना ही हिस्सा देती है जितनी कीमत आपने दिखाई थी। इसलिए हमेशा घर के आज के निर्माण खर्च के हिसाब से ही बीमा लेना चाहिए।
(Exclusions) की जानकारी न होना एक बड़ी बाधा है।ज्यादातर लोग सोचते हैं कि होम इंश्योरेंस लेने के बाद हर तरह के नुकसान की भरपाई होगी, लेकिन असल में ऐसा नहीं होता। बीमा कंपनियां पुरानी टूट-फूट, दीवारों की नमी या सीलन और अपनी खुद की किसी लापरवाही से हुए नुकसान के पैसे नहीं देती हैं। साथ ही, भूकंप या बाढ़ जैसी आपदाओं से सुरक्षा पाने के लिए कभी-कभी अलग से एक्स्ट्रा कवर लेना पड़ता है। अगर आप इन नियमों और शर्तों को पहले से नहीं समझेंगे, तो मुसीबत के समय क्लेम मांगते वक्त कंपनी के साथ विवाद हो सकता है और आपका पैसा अटक सकता है।
कागजी कार्यवाही में कमी भी क्लेम रिजेक्ट होने का एक मुख्य कारण है। किसी भी दुर्घटना के बाद कंपनी को तुरंत जानकारी देना बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा, आपके पास घर के कीमती सामान के बिल, चोरी होने पर पुलिस की रिपोर्ट (FIR) और आग लगने पर फायर विभाग की रिपोर्ट जैसे पक्के सबूत होने चाहिए। अगर आपके पास सही दस्तावेज नहीं हैं, तो कंपनी आपके दावे को झूठा मानकर खारिज कर सकती है।
आखिरी बात जो ध्यान रखने वाली है, वह है ‘डिडक्टिबल्स’ (Deductibles) और कंपनी का भरोसा। बीमा में एक ऐसी राशि होती है जो नुकसान होने पर आपको खुद अपनी जेब से भरनी पड़ती है। साथ ही, हमेशा वैसी कंपनी चुननी चाहिए जिसका क्लेम पास करने का पिछला रिकॉर्ड (Settlement Ratio) अच्छा हो। बिना सोचे-समझे किसी भी कंपनी से बीमा लेना मुसीबत के समय भारी पड़ सकता है।
घर का बीमा केवल कागजी फॉर्मेलिटी या पैसों का लेन-देन नहीं है, बल्कि यह आपके घर के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। पॉलिसी के कागजों में लिखी “बारीक शर्तों” को नज़रअंदाज़ करना भविष्य में आपके लिए बड़ा आर्थिक नुकसान खड़ा कर सकता है। समझदारी इसी में है कि आप समय-समय पर अपनी पॉलिसी को ध्यान से चेक करें और अपनी आज की जरूरतों के हिसाब से उसमें बदलाव करते रहें। अगर आप जागरूक और सतर्क रहेंगे, तभी आपके सपनों का घर वाकई सुरक्षित रह पाएगा।
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