New Delhi News (19 December 2025): दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को ABVP के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन और परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। छात्रों ने आरोप लगाया कि समय पर परीक्षाएं नहीं कराई जा रहीं, परिणाम जारी करने में लगातार देरी हो रही है और कई बार परीक्षा के दिन यह कहकर पेपर टाल दिया जाता है कि प्रश्नपत्र प्रिंट ही नहीं हो पाया। इन तमाम मुद्दों को लेकर छात्रों ने आर्ट फैकल्टी से परीक्षा नियंत्रण कक्ष तक रोड मार्च करते हुए जोरदार नारेबाजी की और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही का सीधा असर हजारों छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है। छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा के दौरान कहीं पेपर देर से पहुंचता है तो कहीं ऐन मौके पर परीक्षा को रीशेड्यूल कर दिया जाता है, जिससे छात्रों की तैयारी, मानसिक स्थिति और आर्थिक हालात बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक और संबंधित अधिकारियों से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि बार-बार हो रही चूक अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के अध्यक्ष आर्यन मान ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वे अपनी परीक्षा छोड़कर छात्रों की मांगों को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए हैं। आर्यन मान ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर जी.एस. टुटेजा अपना इस्तीफा नहीं सौंपते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा, चाहे इसके लिए छात्रों को अपनी परीक्षाएं ही क्यों न छोड़नी पड़ें। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन छात्रों से एक सेकंड की देरी पर भी सख्ती दिखाता है, लेकिन अपनी गलतियों की कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
आर्यन मान ने फीस और आर्थिक नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब कोई छात्र समय पर फीस या फॉर्म जमा नहीं कर पाता, तो उससे अतिरिक्त चार्ज लेकर काम किया जाता है, ऐसे में अब सवाल यह है कि प्रशासन की लापरवाही पर छात्रों को क्या मुआवजा मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले परीक्षा नियंत्रक के कार्यालय में समस्याएं जल्द सुलझाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समस्याएं हल नहीं होतीं तो प्रशासन को कुर्सी छोड़नी पड़ेगी वरना एबीवीपी को कुर्सी छिनने भी अच्छी तरह आती है।
वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के सचिव कुणाल चौधरी ने भी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि कड़ी सुरक्षा के बावजूद वे परीक्षा नियंत्रक से मिलने के लिए कार्यालय पहुंचे थे। कुणाल चौधरी के मुताबिक, परीक्षा नियंत्रक ने केवल तीन-चार प्रतिनिधियों से बात करने की बात कही, जिस पर उन्होंने कहा कि उनका हर कार्यकर्ता उनका प्रतिनिधि है और बातचीत खुले तौर पर होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस साल कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों के पैटर्न अलग-अलग रहे, कहीं पेपर घंटों देरी से पहुंचे और कहीं प्रिंटिंग का बहाना बनाकर परीक्षा टाल दी गई।
छात्रों का कहना है कि इन अव्यवस्थाओं के कारण उन्हें पीजी और किराए के मकानों में अतिरिक्त दिनों तक रहना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जिन छात्रों की परीक्षाएं नहीं हो सकीं, उनकी फीस वापस की जाए और उन्हें हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई की जाए। छात्रों ने कहा कि हजारों-लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है और प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। छात्रों का आरोप है कि जब प्रशासन को छात्रों से फीस लेनी होती है, तब वह सक्रिय रहता है, लेकिन जब बात परीक्षाओं और कक्षाओं की सुचारू व्यवस्था की आती है तो वही प्रशासन आंख-कान बंद कर लेता है। छात्रों ने साफ किया कि वे अपने अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेंगे।।
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