30 साल बाद दक्षिणी रिज को मिला कानूनी संरक्षण, वन संरक्षण को मिलेगी मजबूती

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (19 November 2025): दिल्ली के दक्षिणी रिज के 4080 हेक्टेयर क्षेत्र को आखिरकार 30 वर्षों बाद पूर्ण कानूनी संरक्षण मिल गया है। भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत आरक्षित वन क्षेत्र घोषित करने की प्रक्रिया 1994 से अटकी हुई थी, लेकिन अब अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद यह क्षेत्र आधिकारिक तौर पर संरक्षित घोषित हो गया है। इससे न केवल वन संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि अवैध कब्जों और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी साफ हो गया है। दक्षिणी रिज दिल्ली का सबसे बड़ा हरित क्षेत्र है और पर्यावरणीय दृष्टि से राजधानी के लिए जीवनरेखा माना जाता है।

तीन दशक बाद पूरी हुई कानूनी प्रक्रिया

1994 में पहली अधिसूचना जारी होने के बाद दक्षिणी रिज को आरक्षित वन घोषित करने की प्रक्रिया ठप पड़ गई थी। लंबे समय तक आपत्तियों और तकनीकी औपचारिकताओं के चलते यह अधिसूचना आगे नहीं बढ़ सकी। अब 24 अक्टूबर 2024 को जारी अंतिम अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही यह क्षेत्र भारतीय वन अधिनियम की धारा 20 के तहत संरक्षित घोषित हो गया है। इससे वन विभाग को निगरानी, संरक्षण और प्रबंधन के व्यापक अधिकार मिल गए हैं, जो अब तक अधूरे थे। इससे दिल्ली सरकार को भी कानूनन अतिक्रमण हटाने और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने की अनुमति मिल गई है।

दक्षिणी रिज के दो प्रमुख हिस्सों को मिली मान्यता

अधिसूचना में दक्षिणी रिज के दो महत्वपूर्ण हिस्सों असोल भट्टी क्षेत्र और संजय वन को आधिकारिक तौर पर संरक्षित वन में शामिल किया गया है। पिछले दो वर्षों में औपचारिक सीमांकन (डिमार्केशन) पूरा किया गया था, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया। इससे स्पष्ट हो गया है कि अब रिज क्षेत्र में किसी भी तरह के नए निर्माण, कटाई या भूमि उपयोग परिवर्तन पर तत्काल रोक लागू होगी। इससे दिल्ली की पर्यावरणीय सुरक्षा दीवार और सुदृढ़ होने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब प्रदूषण और हरित क्षेत्र घटने को लेकर लगातार चिंता बढ़ रही है।

13 गांवों में फैला रिज क्षेत्र, अब सख्त निगरानी

दक्षिणी रिज का यह विशाल 4080 हेक्टेयर क्षेत्र 13 गांवों में फैला है, जिनमें भट्टी (770 हेक्टेयर), डेयर मंडी (651.7 हेक्टेयर) और असोला (542.3 हेक्टेयर) जैसे बड़े हिस्से शामिल हैं। कुल 7784 हेक्टेयर क्षेत्र को मूल रूप से आरक्षित घोषित किया जाना था, लेकिन अभी लगभग 96.16 हेक्टेयर हिस्से का सीमांकन बाकी है, जिस पर आगे प्रक्रिया जारी रहेगी। कानूनी संरक्षण मिलने के बाद अब इन इलाकों में अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई होगी, साथ ही वन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन योजनाएँ लागू की जाएँगी। यह कदम दिल्ली के हरित भविष्य और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।।


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