‘लोगों को सीवर मिक्स पानी पीने के लिए मजबूर न करें’: दिल्ली हाई कोर्ट

टेन न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली (04 जुलाई 2025): पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में दूषित पेयजल की शिकायतों पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने दिल्ली जल बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने जल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, “आप लोगों को सीवर मिला हुआ पानी पीने के लिए कह रहे हैं। जब तक कोई अदालत नहीं आता, आप खुद जाकर स्थिति की जांच भी नहीं करते।” यह टिप्पणी कोर्ट ने योजना विहार सहित कई इलाकों में गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायतों पर सुनवाई करते हुए की।

हाईकोर्ट ने जल बोर्ड को निर्देश दिया कि वह योजना विहार में पुरानी पाइपलाइन को तत्काल बदले और पेयजल की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए। कोर्ट ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि वे इस काम में विफल रहते हैं तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह पूरे दिल्ली को इस मामले में शामिल नहीं करेगी, क्योंकि इतने बड़े दायरे की निगरानी कोर्ट के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

याचिकाकर्ता वकील ध्रुव गुप्ता द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि योजना विहार, आनंद विहार, जागृति एन्क्लेव जैसे क्षेत्रों में घरों में गंदा और काले रंग का पानी आ रहा है, जिसमें सीवर का मिश्रण तक पाया जा रहा है। इस पानी का उपयोग करने से स्थानीय निवासी गंभीर स्वास्थ्य संकट में पड़ सकते हैं। याचिका में यह भी बताया गया कि जल बोर्ड को कई बार शिकायत देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) को निर्देश दिया है कि वह घर-घर जाकर जल की गुणवत्ता की जांच करे और प्रत्येक प्रभावित इलाके की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करे। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “पेयजल नागरिकों का मौलिक अधिकार है। यदि उसमें सीवर का पानी मिल रहा है, तो यह न सिर्फ लापरवाही है बल्कि जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ भी है।” कोर्ट ने कहा कि पानी की गुणवत्ता की रंग, गंध और स्वाद के आधार पर भी जांच की जाए।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब दिल्ली जल बोर्ड पर दबाव बढ़ गया है कि वह जल आपूर्ति तंत्र की कमियों को दूर करे और पाइपलाइनों की समय रहते मरम्मत व सफाई सुनिश्चित करे। इस मामले की अगली सुनवाई में दिल्ली जल बोर्ड से विस्तृत जवाब और सुधारात्मक कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है। स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि न्यायालय के हस्तक्षेप से उनकी समस्याओं का जल्द समाधान होगा।


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