नई दिल्ली (25 अप्रैल 2025): कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। धर्म पूछकर 28 निर्दोष पर्यटकों की हत्या ने न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार किया, बल्कि देश के हर नागरिक के भीतर गुस्से और आक्रोश की लहर दौड़ा दी। इस क्रूर वारदात के खिलाफ अब आवाजें बुलंद हो रही हैं और हर वर्ग एकजुट होकर आतंक के खिलाफ खड़ा हो रहा है। शुक्रवार को दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद की सीढ़ियों से वह नज़ारा देखने को मिला, जो देश की एकता, अखंडता और भाईचारे की मिसाल बन गया। जुमे की नमाज के बाद हजारों मुसलमानों ने हाथों में तिरंगा और ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के पोस्टर उठाकर न सिर्फ हमले की निंदा की, बल्कि आतंक के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान भी किया।
इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि जामा मस्जिद से पाकिस्तान और आतंकवाद दोनों को खुला संदेश दिया गया कि अब भारतीय मुसलमान खामोश नहीं बैठेंगे। जामा मस्जिद की सीढ़ियों से गूंजती आवाजों ने साफ कर दिया कि आतंकवाद किसी एक धर्म का नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत का दुश्मन है। वक्ताओं ने कहा, “जो हमारी सरज़मीं की तरफ बुरी नजर डालेगा, सबसे पहले हिन्दुस्तान का मुसलमान खून देगा, लेकिन मुल्क की हिफाजत में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।” प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि अब सरकार को सिर्फ बयान नहीं, बल्कि कड़े और निर्णायक कदम उठाने होंगे ताकि आतंक के सरगनाओं को करारा सबक मिल सके।
जामा मस्जिद पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने उन कश्मीरी लोगों की भी सराहना की, जिन्होंने आतंकियों का मुकाबला किया और कई जानें बचाईं। उन्होंने उन 28 परिवारों के प्रति संवेदना जताई, जिनके अपने इस हमले में मारे गए। उन्होंने कहा, “हम उनके साथ हैं, हम सबका दुख एक है। आतंकवाद न हिन्दू देखता है, न मुसलमान। वो सिर्फ मौत बांटता है और हम उसका हर हाल में विरोध करेंगे।” प्रदर्शन के दौरान बार-बार यह आवाज उठी कि अब वक्त आ गया है कि भारत की 140 करोड़ जनता एक सुर में आतंक के खिलाफ खड़ी हो जाए।
इस प्रदर्शन ने उन ताकतों को भी करारा जवाब दिया जो यह समझते हैं कि मुसलमान आतंक के खिलाफ नहीं बोलते। जामा मस्जिद की सीढ़ियों से यह साफ हो गया कि भारत का मुसलमान अपने देश की अखंडता के साथ खड़ा है और आतंकवाद के खिलाफ किसी भी लड़ाई में पीछे नहीं हटेगा। वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल सीमा पार से आए आतंकियों से नहीं, बल्कि उन विचारों से भी है जो देश को बांटना चाहते हैं, मजहब के नाम पर भाई को भाई से लड़वाना चाहते हैं। लेकिन भारत का मुसलमान हर उस ताकत को नकारता है जो इस देश की एकता को तोड़ने की कोशिश करे।
जामा मस्जिद से निकली यह हुंकार अब पूरे देश में गूंज रही है, हर घर से निकलेगी आवाज, आतंक को मिलेगा जवाब। और यह जवाब न सिर्फ शब्दों में होगा, बल्कि एकता, इंसानियत और मजबूती से भरे कदमों में झलकेगा। आतंकवाद के खिलाफ अब देश का हर नागरिक खड़ा है, चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान, सिख हो या ईसाई। मुल्क एकजुट है और यह एकजुटता ही पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की सबसे बड़ी हार है।
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