पोप फ्रांसिस के निधन पर भारत में तीन दिनों का राजकीय शोक

टेन न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली (22 अप्रैल 2025): पोप फ्रांसिस के निधन पर भारत ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए सोमवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका दिया। वेटिकन के अनुसार, 88 वर्षीय पोप का निधन उनके निवास पर सुबह 7:35 बजे स्ट्रोक और इसके बाद हृदय विफलता से हुआ। ईसीजी टेस्ट के माध्यम से उनकी मृत्यु की पुष्टि की गई। भारत सरकार ने इस दुखद क्षण पर वैश्विक नेतृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए यह प्रतीकात्मक कदम उठाया। इससे पहले भी भारत ने अंतरराष्ट्रीय नेताओं के निधन पर ऐसी श्रद्धांजलि दी है। यह परंपरा राष्ट्रीय शोक की भावना को दर्शाती है। पोप फ्रांसिस के निधन से विश्वभर में शोक की लहर दौड़ गई है।

विश्वभर के नेताओं ने पोप फ्रांसिस को श्रद्धांजलि अर्पित की है। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने उन्हें गरीबों और शरणार्थियों का सच्चा हितैषी बताया। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने उनके करुणामय स्वभाव और अथक सेवा भावना की सराहना की। पोप फ्रांसिस ने अपने कार्यकाल में मानवीय मूल्यों, समानता और धर्मों के बीच संवाद को प्रोत्साहित किया। उन्होंने हमेशा उपेक्षित समुदायों की आवाज़ बने रहने की कोशिश की। उनके विचार और कार्य लंबे समय तक याद रखे जाएंगे। भारतीय ईसाई समुदाय में भी उनके प्रति गहरा सम्मान और जुड़ाव था।

वेटिकन में पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार की तैयारियां ज़ोरों पर हैं। उनकी मृत्यु के चार से छह दिन के भीतर अंत्येष्टि होगी, इसके बाद नौ दिन का आधिकारिक शोक मनाया जाएगा। मंगलवार को कार्डिनल्स की बैठक में अंतिम संस्कार की तारीख तय की जाएगी। इसके बाद एक कॉन्क्लेव का आयोजन होगा जिसमें नए पोप का चुनाव किया जाएगा। पोप फ्रांसिस की अंतिम इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार सादगी से किया जाए। उन्होंने एक सामान्य कब्र की मांग की थी, जो उनके विनम्र और आध्यात्मिक व्यक्तित्व का परिचायक है। उनके अनुयायियों के लिए यह एक भावनात्मक क्षण है।

पोप फ्रांसिस के जीवन में अनेक ऐतिहासिक पहलें शामिल थीं। 2024 में उन्होंने इंडोनेशिया की इस्टिकलाल मस्जिद के ग्रैंड इमाम से मुलाकात की थी, जो अंतरधार्मिक संवाद का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बना। उन्होंने पापों के लिए चर्च की ओर से क्षमा याचना करते हुए इतिहास के कई काले अध्यायों को स्वीकार किया। पर्यावरण संरक्षण, लैंगिक समानता और युद्ध विरोधी संदेशों के लिए भी वे जाने जाते हैं। भारत सहित पूरी दुनिया में उनके योगदान को श्रद्धा से याद किया जा रहा है। उनका निधन न केवल धार्मिक दुनिया, बल्कि मानवीय मूल्यों के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है।


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