नई दिल्ली (01 अप्रैल 2025): देश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान एम्स (AIIMS) दिल्ली के राष्ट्रीय वृद्धजन केंद्र और गर्ल्स हॉस्टल में दूषित पानी के सेवन से 65 से 70 लोग बीमार हो गए हैं। जांच में पानी में फीकल बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई है, जो सीवर लीकेज के कारण पानी में मिल गया था। बीमार होने वालों में कई डॉक्टर, स्टाफ और उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। अचानक बड़ी संख्या में लोगों की तबीयत बिगड़ने के बाद एम्स प्रशासन हरकत में आया और पानी की टंकियों की सफाई कराई गई। साथ ही पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
कैसे हुआ खुलासा?
17 से 22 मार्च के बीच एम्स के अस्पताल ब्लॉक, हॉस्टल और आवासीय परिसर से पानी के सैंपल लिए गए थे। 24 मार्च को आई रिपोर्ट में वृद्धजन केंद्र की पहली और दूसरी मंजिल के पानी में फीकल बैक्टीरिया की पुष्टि हुई। इसके अलावा, हॉस्टल नंबर चार के भूतल पर लगे पानी के सैंपल में भी यह बैक्टीरिया पाया गया। फीकल बैक्टीरिया आमतौर पर सीवरेज के संपर्क में आने से पानी में पहुंचता है, जिससे गंभीर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियां हो सकती हैं।
पिछले कुछ दिनों में तेजी से बिगड़ी लोगों की तबीयत
इस दूषित पानी के कारण एम्स के पश्चिमी अंसारी नगर परिसर में रहने वाले डॉक्टरों और उनके परिवारों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगीं। बीमार लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ते हुए 65-70 तक पहुंच गई, जिससे प्रशासन के लिए यह एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन गया। रविवार को मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई, जिसके बाद इंजीनियरिंग विभाग को मामले की जांच और समाधान के लिए बुलाया गया।
एम्स प्रशासन की कार्रवाई
डॉक्टरों की शिकायत के बाद एम्स के इंजीनियरिंग विभाग ने सोमवार को भूमिगत वाटर टैंक की सफाई कराई। प्रशासन ने यह भी कहा कि तीन महीने पहले, 24 दिसंबर को टैंक की सफाई की गई थी, लेकिन फिर भी पानी में फीकल बैक्टीरिया मिलना गंभीर चिंता का विषय है। इसके अलावा, पानी की पाइप लाइन और सीवर सिस्टम की भी जांच की जा रही है, ताकि लीकेज की वास्तविक वजह का पता लगाया जा सके।
पानी और सीवर लाइनों की जर्जर स्थिति बनी समस्या
एम्स के वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि पश्चिमी परिसर की पाइप लाइन और सीवर लाइन काफी पुरानी हो चुकी हैं, जिससे समय-समय पर लीकेज की समस्या सामने आती रहती है। आशंका जताई जा रही है कि किसी पाइप के क्षतिग्रस्त होने से सीवर का पानी पीने के पानी में मिल गया होगा। यदि समय रहते इसे नहीं सुधारा गया तो भविष्य में इससे भी बड़ी स्वास्थ्य आपदा उत्पन्न हो सकती है।
एम्स प्रशासन का बयान
एम्स के मीडिया डिवीजन की प्रभारी डॉ. रीमा ने कहा कि पश्चिमी अंसारी नगर के भूमिगत वाटर टैंक की सफाई कर दी गई है और पानी के नए सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। सीवर लाइन की भी गहनता से जांच की गई है। पानी आपूर्ति सोमवार शाम से पुनः शुरू कर दी गई है, लेकिन प्रशासन यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो।
भविष्य में रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
यह मामला सामने आने के बाद एम्स प्रशासन भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की योजना बना रहा है। पाइप लाइनों और सीवर सिस्टम को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा, हर महीने पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच कराई जाएगी ताकि किसी भी तरह के दूषित तत्वों की समय रहते पहचान की जा सके। एम्स में इलाज कराने आने वाले हजारों मरीजों और वहां रहने वाले डॉक्टरों के लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होगी।
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