22% अमीरों को भारत नहीं आ रहा रास, विदेश में बसने की चाहत

टेन न्यूज नेटवर्क

नई दिल्ली (27 मार्च 2025): एक हालिया सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिसमें यह पता चला है कि भारत के करीब 22% अति धनाढ्य लोग अब देश छोड़कर विदेश में बसना चाहते हैं। यह रिपोर्ट परामर्श कंपनी हेनली एंड पार्टनर्स और कोटेक प्राइवेट बैंकिंग द्वारा किए गए सर्वे में सामने आई है। अमीरों के विदेश जाने की प्राथमिक वजह बेहतर जीवन स्तर और कारोबार के अधिक अवसर बताए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हर साल करीब 25,000 भारतीय दूसरे देशों में बस जाते हैं। सर्वे में शामिल करोड़पति लोगों ने बताया कि वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने और व्यवसायिक संभावनाओं को देखते हुए विदेश में स्थायी निवास की योजना बना रहे हैं। इनमें से अधिकतर लोग अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और सिंगापुर जैसे देशों में बसने की इच्छा रखते हैं, जहां उन्हें कारोबार और जीवन की अधिक सुविधाएं मिलती हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि कर प्रणाली, स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति और आर्थिक नीतियों में सुधार की आवश्यकता है, ताकि अमीर वर्ग भारत में ही निवेश और व्यापार करना जारी रखे। रिपोर्ट के अनुसार, बीते साल 150 अति धनाढ्य भारतीयों ने गोल्डन वीजा प्रोग्राम के तहत यूरोप और अन्य देशों में निवास के लिए आवेदन किया है।

सर्वे में शामिल लोगों ने अपनी पसंद के देश चुनने के पीछे मुख्य रूप से कर लाभ, जीवन स्तर और राजनीतिक स्थिरता जैसे कारण बताए। इसके अलावा, वे अपने बच्चों के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा चाहते हैं और विदेशी नागरिकता को एक बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं।हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि कई भारतीय उद्योगपति भारत को पूरी तरह छोड़ने के बजाय विदेश में अपनी दूसरी नागरिकता के रूप में देख रहे हैं। वे अब भी भारत में निवेश कर रहे हैं, लेकिन अपने परिवार और संपत्तियों को विदेश में स्थापित कर रहे हैं।

इस बढ़ते रुझान के चलते सरकार को आर्थिक सुधारों और व्यवसायिक नीतियों को अधिक आकर्षक बनाने की जरूरत है, ताकि देश का धनाढ्य वर्ग भारत में ही रहे और यहां निवेश करे। अन्यथा, यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।


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