संयुक्त किसान मोर्चा और प्रशासन के बीच बैठक, किन मुद्दों पर बनी सहमति?
टेन न्यूज नेटवर्क
ग्रेटर नोएडा, (20 मार्च 2025): गौतमबुद्ध नगर में किसानों के अधिकारों और मांगों को लेकर चल रही संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत के दूसरे दिन एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह बैठक नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यमुना प्राधिकरण के सीईओ के साथ-साथ गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा के 14 संगठनों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया, जिसमें कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी।
बैठक में तय किया गया कि भूमि अधिग्रहण के मामले में सभी किसानों को समान लाभ मिलेगा, चाहे उनकी जमीन अधिग्रहण, क़रार, बैनामे या किसी अन्य तरीके से ली गई हो। इसके अलावा, किसानों और प्रशासन के बीच आगे की वार्ताओं के लिए भी तिथियाँ निर्धारित कर दी गई हैं। 24 मार्च से किसानों और अधिकारियों के बीच नियमित बैठकें होंगी, जबकि 28 मार्च को प्रमुख सचिव (औद्योगिक) के साथ गौतमबुद्ध नगर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद, वार्ता का अगला दौर लखनऊ में होगा।
संयुक्त किसान मोर्चा ने धरने को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है, लेकिन चेतावनी दी है कि यदि वार्ता का क्रम तोड़ा गया या प्रशासन ने उदासीन रवैया अपनाया, तो आंदोलन को और बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। किसानों की प्रमुख मांगों में 10% प्लॉट, 2013 भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत लाभ, विस्थापित गांवों को लाभ पहुंचाने, 64% मुआवजा दिलाने और रोजगार के संसाधन उपलब्ध कराने जैसी मांगें शामिल हैं।
इसके अलावा, किसानों को टोल टैक्स से छूट देने और सर्किल रेट में बढ़ोतरी के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने आश्वासन दिया कि अगले एक सप्ताह के भीतर सर्किल रेट में वृद्धि की घोषणा की जाएगी। यमुना प्राधिकरण ने बैक लीज की लिस्ट जारी करने और गांवों में बैठक कर प्रक्रिया शुरू करने की बात कही, जबकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों ने भी बैक लीज और शिफ्टिंग से जुड़े मुद्दों को हल करने का आश्वासन दिया।
बैठक में एनटीपीसी और बिल्डर्स से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि 23 से 27 मार्च के बीच इन मुद्दों पर विशेष बैठक होगी, जिसके बाद 28 मार्च को प्रमुख सचिव (औद्योगिक) के साथ उच्च स्तरीय वार्ता होगी। सभी निर्णयों की जानकारी मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक की जाएगी।
संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन किसानों की मांगों को गंभीरता से लेकर समाधान करता है, तो आगे भी वार्ता के माध्यम से समस्याओं का हल निकाला जाएगा। लेकिन यदि वार्ता विफल होती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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