नागपुर हिंसा पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने क्या कहा ? | BJP – RSS पर साधा निशाना
टेन न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई (18 मार्च 2025): महाराष्ट्र में औरंगजेब की मजार को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे के बीच नागपुर में भड़की हिंसा ने भी राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। उद्धव ठाकरे गुट शिवसेना के नेता संजय राउत ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि औरंगजेब की कब्र को हटाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने हिंसा के लिए हिंदू संगठनों को जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर हमला बोला। राउत ने कहा कि अगर सरकार वाकई औरंगजेब की कब्र हटाना चाहती है तो उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आधिकारिक आदेश लेना चाहिए, बजाय इसके कि जनता को सड़कों पर लाकर आंदोलन कराया जाए।
संजय राउत ने कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज और मराठाओं ने औरंगजेब के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी, लेकिन वे उसे पूरी तरह से हरा नहीं पाए। महाराष्ट्र में उसकी कब्र बनी, यह इतिहास है और इसे वैसा ही रहने देना चाहिए।” उन्होंने कहा कि नए हिंदुत्ववादी नेता बिना इतिहास को समझे मुद्दों को भड़का रहे हैं, जबकि असली मुद्दे महंगाई, किसानों की आत्महत्या और बेरोजगारी हैं। उन्होंने सवाल किया कि सरकार इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान क्यों नहीं देती और केवल सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देने में लगी रहती है।
नागपुर में हुई हिंसा पर संजय राउत ने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि “नागपुर आरएसएस का गढ़ है और देवेंद्र फडणवीस का गृह क्षेत्र भी है। ऐसे में वहां हिंसा फैलाने की हिम्मत कौन कर सकता है?” उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक सोची-समझी साजिश है, जहां हिंदुओं को आपस में लड़ाने और डराने का नया पैटर्न अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और देश में अस्थिरता पैदा करने के लिए इस तरह के मुद्दों को जानबूझकर उछाला जा रहा है।
संजय राउत ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि “अगर वास्तव में औरंगजेब की कब्र को हटाना है, तो भाजपा और केंद्र सरकार को आधिकारिक आदेश जारी करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि “देश में नरेंद्र मोदी की सरकार है, आरएसएस का प्रभाव है, तो फिर आंदोलन करने की जरूरत क्यों है? अगर सरकार वाकई ऐसा चाहती है, तो एक आदेश जारी करे और कब्र हटा दे, लेकिन यह नाटक बंद करे।” उन्होंने कहा कि बार-बार ऐसे मुद्दे उठाकर जनता का ध्यान असली समस्याओं से भटकाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि “एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस कह रहे हैं कि जनता की भावना के अनुसार वे इस मुद्दे पर काम करेंगे, लेकिन सच्चाई यह है कि यह सरकार अमित शाह और केंद्र के इशारे पर चल रही है।” उन्होंने कहा कि “शौर्य का प्रतीक कभी मिटाया नहीं जाना चाहिए। इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश करने वाले लोग खुद इतिहास के दुश्मन हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के संघर्ष को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है, और इसीलिए अफजल खान या औरंगजेब की कब्र को मिटाने की बजाय उसे इतिहास का हिस्सा बनाए रखना चाहिए।
इस पूरे विवाद के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में नया तनाव पैदा हो गया है। भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और उद्धव ठाकरे गुट आमने-सामने आ गए हैं। जहां एक तरफ भाजपा और हिंदूवादी संगठन औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग कर रहे हैं, वहीं संजय राउत और विपक्ष इसे एक “राजनीतिक ड्रामा” करार देकर सरकार पर हमले कर रहे हैं। इस विवाद के क्या परिणाम होंगे, यह आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन फिलहाल यह मामला सियासी माहौल को और गरमा चुका है।।
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