नई दिल्ली (1 मार्च 2025): आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक नरेश बालियान की मकोका (MCOCA) केस में मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की एक अहम मांग को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को जांच पूरी करने के लिए 60 दिन का विस्तार दिया है, हालांकि पुलिस ने 90 दिन का समय मांगा था। इससे पहले बालियान की हिरासत की 90 दिन की अवधि 3 मार्च 2025 को पूरी होने वाली थी।
नरेश बालियान को 4 दिसंबर 2024 को दिल्ली पुलिस ने मकोका के तहत संगठित अपराध के आरोप में गिरफ्तार किया था। खास बात यह है कि उसी दिन उन्हें जबरन वसूली के एक अन्य मामले में अदालत से जमानत मिल गई थी, लेकिन मकोका के तहत गिरफ्तारी के कारण वे जेल से बाहर नहीं आ सके। पुलिस के मुताबिक, बालियान पर संगठित अपराध में संलिप्त रहने और अपराधियों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नरेश बालियान का नाम एक वायरल ऑडियो टेप में सामने आया था, जिसमें वे कथित तौर पर गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू से बातचीत कर रहे थे। इसी ऑडियो को आधार बनाकर पुलिस ने जांच शुरू की और बाद में सबूत मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उत्तम नगर से विधायक रहे बालियान को पहले एक साल पुराने जबरन वसूली के केस में हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में मकोका के तहत कार्रवाई करते हुए उनकी गिरफ्तारी की गई।
इस मामले में AAP के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार राजनीतिक विरोधियों को फंसाने के लिए जबरन कानूनों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “पीएमएलए और मकोका जैसे कठोर कानून इनके लिए खिलौनों की तरह हैं। जब भी किसी विपक्षी नेता को झूठे केस में फंसाना होता है, ये अपनी पॉकेट से कोई भी कानून निकालकर उस पर थोप देते हैं।” उन्होंने केंद्र सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया। नरेश बालियान की गिरफ्तारी को लेकर AAP लगातार बीजेपी पर हमला कर रही है। पार्टी का दावा है कि बालियान के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं और उन्हें केवल विपक्ष की आवाज दबाने के लिए फंसाया गया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस मामले में गंभीर आपराधिक गतिविधियों की जांच की जा रही है और आगे और भी खुलासे हो सकते हैं। पुलिस को उम्मीद है कि अतिरिक्त 60 दिनों के समय में वे ठोस सबूत जुटा सकेंगे।
अब यह देखना होगा कि दिल्ली पुलिस अपनी जांच में क्या नए तथ्य पेश करती है और क्या अदालत इस मामले में कोई और कड़ी कार्रवाई करती है। फिलहाल, नरेश बालियान को जेल में ही रहना होगा और इस केस की अगली सुनवाई में ही तय होगा कि उन्हें किसी तरह की राहत मिल सकती है या नहीं।
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