UGC के नए नियमों पर केंद्र सरकार करेगी पुनर्विचार?, समिति बनाने का दिया संकेत

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (06 November 2026): विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए जातिगत भेदभाव विरोधी नियमों को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अहम जानकारी दी है। गुरुवार, 5 नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि वह ‘यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) रेगुलेशंस, 2026’ की समीक्षा कर रही है। इसके लिए एक समिति गठित करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि नियमों को लेकर छात्रों के बीच बनी चिंताओं और आपत्तियों का समाधान किया जा सके। सरकार का कहना है कि किसी भी वर्ग के छात्र को असंतुष्ट या आशंकित महसूस नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सरकार इस पूरे मामले की जांच कर रही है और छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदमों पर विचार किया जा रहा है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे सभी युवा संतुष्ट महसूस करें और किसी भी वर्ग के छात्र को यह न लगे कि उसके साथ गलत व्यवहार हो रहा है। कोर्ट ने सभी छात्रों के हितों की रक्षा करने की जरूरत पर जोर देते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी।

दरअसल, यूजीसी ने इसी साल 13 जनवरी को उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नए नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गईं। याचिकाकर्ताओं की प्रमुख आपत्ति नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा को लेकर थी। उनका कहना था कि नियमों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के खिलाफ भेदभाव का उल्लेख तो किया गया है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा झूठी शिकायत दर्ज कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को इन नए नियमों पर रोक लगा दी थी। तत्कालीन सुनवाई में अदालत ने नियमों की भाषा और उनके संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई थी। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि पहली नजर में नियम समाज में विभाजन पैदा करने वाले प्रतीत होते हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अदालत ने निर्देश दिया था कि नए नियमों पर रोक रहने तक यूजीसी के 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे।

इस पूरे मामले का संबंध ‘अबेदा सलीम तडवी बनाम भारत संघ’ और इससे जुड़ी अन्य याचिकाओं से भी है। वर्ष 2019 में रोहित वेमुला और पायल तडवी की माताओं ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव के खिलाफ मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी। दोनों छात्रों की कैंपस में जातिगत भेदभाव के बाद आत्महत्या हो गई थी। अब केंद्र सरकार की ओर से नियमों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने पर विचार किए जाने के बाद इस मामले में नए बदलाव की संभावना बनी है। हालांकि, फिलहाल 2026 के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक बरकरार है और अगली सुनवाई में सरकार को इस मामले में अपना पक्ष आगे रखना होगा।


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