42 साल बाद 1 नवंबर को कांग्रेस की रैली पर सिरसा का सवाल—क्या 1984 के जख्म फिर कुरेदना चाहती है कांग्रेस?

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (01 November 2026): 1984 के सिख विरोधी नरसंहार की 42वीं बरसी पर दिल्ली में सिख समाज ने पदयात्रा निकालकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी और पीड़ित परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त की। इस दौरान दिल्ली सरकार के मंत्री एवं वरिष्ठ सिख नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कांग्रेस द्वारा रामलीला मैदान में आयोजित रैली पर सवाल उठाते हुए इसे सिख समाज की भावनाओं के प्रति असंवेदनशील बताया।

हरिनगर डिपो से तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक निकाली गई पदयात्रा में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, मंत्री आशीष सूद सहित सांसद, विधायक और बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग शामिल हुए।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि 1 नवंबर 1984 भारतीय इतिहास का काला अध्याय है, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। हजारों परिवारों ने अपने परिजनों को खोया और 42 साल बाद भी पीड़ित न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे संवेदनशील दिन पर कांग्रेस द्वारा राजनीतिक रैली आयोजित करना क्या सिख समाज के जख्मों को फिर से कुरेदने जैसा नहीं है?

मोदी सरकार के कार्यकाल में SIT गठन और अतिरिक्त मुआवजे का दावा

सिरसा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 1984 के मामलों को दोबारा गंभीरता से उठाया। दिसंबर 2014 में पीड़ित परिवारों के लिए प्रति मृतक 5 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता मंजूर की गई और फरवरी 2015 में बंद गंभीर मामलों की दोबारा जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया आज भी जारी है।

 

 

रकाबगंज मामले में भी न्याय की लड़ाई जारी

रकाबगंज गुरुद्वारा हिंसा का जिक्र करते हुए सिरसा ने कहा कि 1 नवंबर 1984 को वहां दो सिखों की हत्या हुई थी। उन्होंने इस मामले में कांग्रेस नेता कमलनाथ की कथित भूमिका से जुड़े आरोपों और जांच का उल्लेख किया। हालांकि, कमलनाथ इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। सिरसा ने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।

CEC को उठाकर ले जाने वाले बयान पर भी जताई चिंता

झारखंड के कांग्रेस नेता एवं मंत्री के उस कथित बयान पर भी सिरसा ने चिंता जताई, जिसमें 10 हजार समर्थकों के साथ दिल्ली आकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को उठाकर रांची ले जाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन किसी संवैधानिक संस्था के प्रमुख के खिलाफ भीड़ के बल पर कार्रवाई करने जैसी भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती।

सिरसा ने कहा कि 1984 के पीड़ित परिवारों की पीड़ा किसी भी राजनीतिक आयोजन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। पदयात्रा का उद्देश्य मृतकों को श्रद्धांजलि देना, पीड़ित परिवारों के साथ खड़े रहना और न्याय की आवाज को बुलंद करना है।


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