बुलंदशहर-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के सर्वे का टेंडर जारी, 56 गांवों की जमीन पर पड़ेगा असर
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (27/10/2026): पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को नई मजबूती देने वाली बुलंदशहर-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। करीब 74.3 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन (Social Impact Assessment) सर्वे का टेंडर जारी होने की जानकारी सामने आई है। इस परियोजना के जरिए गंगा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ने की योजना है। इसके पूरा होने पर बुलंदशहर और आसपास के क्षेत्रों से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के लिए बुलंदशहर जिले के 48 और गौतमबुद्ध नगर के 8 गांवों सहित कुल 56 गांवों की भूमि परियोजना के दायरे में आ सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसके लिए करीब 677.80 हेक्टेयर जमीन की जरूरत बताई गई है। ऐसे में परियोजना का असर स्थानीय किसानों, प्रभावित परिवारों और ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।
74.3 किलोमीटर लंबा होगा प्रस्तावित कॉरिडोर
बुलंदशहर-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख सड़क मार्गों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से विकसित करने की योजना है। इसका प्रस्तावित मार्ग बुलंदशहर जिले की स्याना तहसील के लाडपुर क्षेत्र से शुरू होकर जेवर के पास यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंचने से जुड़ा है।
इस कॉरिडोर के बनने से गंगा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक हो सकता है। इससे न केवल आम यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा, बल्कि माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। जेवर एयरपोर्ट के विकास के साथ इस सड़क संपर्क का महत्व और बढ़ सकता है।
56 गांवों की जमीन का होगा आकलन, किसानों पर भी नजर
परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि में बुलंदशहर के 48 और गौतमबुद्ध नगर के 8 गांव शामिल बताए जा रहे हैं। करीब 677.80 हेक्टेयर जमीन से जुड़ी इस योजना में हजारों किसानों और स्थानीय परिवारों के हित महत्वपूर्ण होंगे।
सामाजिक प्रभाव आकलन सर्वे का उद्देश्य परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले परिवारों, आजीविका, स्थानीय रोजगार, कारोबार और सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन करना है। सर्वे के माध्यम से यह समझने में मदद मिलेगी कि एक्सप्रेसवे निर्माण का ग्रामीण क्षेत्रों पर किस प्रकार का प्रभाव पड़ सकता है।
भूमि खरीद और अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रिया में किसानों को उचित मुआवजा देना तथा निर्धारित नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण रहेगा। सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और प्रभावित लोगों से जुड़े पहलुओं पर निर्णय लिया जा सकता है।
लाडपुर से जेवर तक बनेगा संपर्क मार्ग
प्रस्तावित रूट बुलंदशहर जिले की स्याना, शिकारपुर, बुलंदशहर, खुर्जा और सिकंदराबाद तहसीलों के विभिन्न गांवों से होकर गुजरने की योजना से जुड़ा है। इसके आगे गौतमबुद्ध नगर के जेवर क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे के निकट सड़क नेटवर्क से संपर्क स्थापित करने का प्रस्ताव है।
इस मार्ग के विकसित होने से बुलंदशहर और आसपास के इलाकों के लोगों को जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। साथ ही, गंगा एक्सप्रेसवे से यमुना एक्सप्रेसवे तक माल और यात्रियों की आवाजाही को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
क्या बुलंदशहर से जेवर का सफर 30 मिनट में पूरा होगा?
बुलंदशहर-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर सामने आ रही खबरों में यात्रा का समय घटकर करीब 25 से 30 मिनट होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस समय को अभी आधिकारिक और सुनिश्चित यात्रा अवधि नहीं माना जा सकता।
वास्तविक यात्रा समय एक्सप्रेसवे के अंतिम अलाइनमेंट, प्रवेश और निकास बिंदुओं, निर्धारित गति सीमा तथा यात्रा के शुरुआती और अंतिम स्थान पर निर्भर करेगा। परियोजना पूरी होने के बाद जेवर एयरपोर्ट और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच अधिक सुविधाजनक हो सकती है। इससे मौजूदा सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिलने की संभावना है।
औद्योगिक विकास और लॉजिस्टिक्स को मिल सकता है बढ़ावा
बुलंदशहर-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे का महत्व केवल सड़क संपर्क तक सीमित नहीं है। बेहतर कनेक्टिविटी से औद्योगिक इकाइयों, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स केंद्रों और विनिर्माण गतिविधियों के विकास को बढ़ावा मिल सकता है। जेवर एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र से संपर्क मजबूत होने पर माल की आवाजाही और परिवहन लागत में भी सुधार की संभावनाएं बन सकती हैं।
इससे बुलंदशहर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। हालांकि, लगभग 3,000 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक नगरी, मैन्युफैक्चरिंग हब या गारमेंट पार्क जैसी योजनाओं को लेकर किसी भी प्रस्ताव की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही की जानी चाहिए।
निर्माण की समयसीमा पर अभी आधिकारिक जानकारी का इंतजार
परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सर्वे, भूमि से संबंधित प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताएं महत्वपूर्ण चरण होंगे। कुछ रिपोर्टों में निर्माण शुरू होने और 2029 या 2030 तक एक्सप्रेसवे पूरा होने की संभावनाएं व्यक्त की गई हैं, लेकिन फिलहाल इन तारीखों को अंतिम समयसीमा नहीं माना जाना चाहिए।
निर्माण कार्य कब शुरू होगा और परियोजना कब तक पूरी होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी संबंधित विभागों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही सामने आएगी।
कुल मिलाकर, बुलंदशहर-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना साबित हो सकता है। गंगा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के बीच संपर्क बेहतर होने से क्षेत्रीय आवागमन, माल परिवहन और औद्योगिक विकास को लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं, परियोजना से प्रभावित गांवों के किसानों और परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए भूमि संबंधी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाना भी अहम होगा।
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