मांगे मान लिए जाने के बाद भी जामिया में छात्रों का प्रदर्शन जारी, अब क्या है उनकी डिमांड

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (27 October 2026): जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) में छात्रों का आंदोलन 14वें दिन भी जारी है। 26 अक्टूबर को छात्रों की मांगें माने जाने और समझौता होने की खबरों के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी मांगों पर सहमति बनने का जो दावा किया है, वह सही नहीं है। प्रदर्शनकारी छात्र छात्र संघ की बहाली और चुनाव की तारीख तय करने समेत अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन चाहते हैं। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलन के बीच छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर एसएफआई (SFI) और जामिया के छात्र कार्यकर्ता अबूजर ने भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इस बीच भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। इससे पहले दो छात्रों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, जिसके बाद भूख हड़ताल करने वाले छात्रों की संख्या तीन रह गई थी। अब दो और छात्रों के हड़ताल में शामिल होने से विरोध तेज हो गया है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्र ऋतिक ने कहा कि यह छात्रों की लड़ाई है और वे इसे आखिर तक लड़ेंगे। उन्होंने मांग की कि प्रशासन छात्र संघ चुनाव के लिए एक निश्चित तारीख घोषित करे, जिसके बाद आंदोलन वापस लेने पर विचार किया जा सकता है।

प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच सहमति को लेकर भी विवाद गहरा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा था कि छात्रों ने कथित मानहानिकारक बयानों के लिए माफी मांगने और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने पर सहमति जताई है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों ने इन दावों को खारिज कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव कराने और छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने प्रॉक्टर और सिक्योरिटी एडवाइजर के इस्तीफे की मांग भी दोहराई है। छात्रों का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा और सभी मांगों पर लिखित जवाब जरूरी है।

लगातार जारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए जामिया प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। विश्वविद्यालय ने अगले आदेश तक सभी कोर्सों की कक्षाएं ऑनलाइन मोड में संचालित करने का फैसला किया है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी छात्रों को नॉर्थ कैंपस की गुलिस्तान-ए-गालिब बिल्डिंग और गालिब लॉन खाली करने की अंतिम चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय तक परिसर खाली नहीं करने पर संबंधित छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में एक ओर छात्र अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन के बिना पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने परिसर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ा कदम उठाया है।

इस बीच भूख हड़ताल पर बैठे छात्र ऋतिक ने जामिया की दीवारों पर लिखे गए आपत्तिजनक नारों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह और जामिया के छात्र इस तरह के नारों का समर्थन नहीं करते तथा मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। ऋतिक ने कहा कि कश्मीर हमेशा भारत का था, है और रहेगा। उनके मुताबिक, इस तरह के नारों के जरिए छात्र आंदोलन को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। फिलहाल छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित करने और अन्य मांगों पर लिखित आश्वासन की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है, जबकि प्रशासन की अंतिम चेतावनी के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।


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