विकसित भारत @ 2047 के लिए सोनल मानसिंह ने रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर दिया जोर

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (26 October 2026): नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 24 अक्टूबर को ‘स्वर्णिका संवाद’ भारत की रचनात्मक एवं सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था’ का आयोजन किया गया। सेंटर फॉर इंडियन क्लासिकल डांस (CICD) के स्वर्ण जयंती समारोह के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में कला और संस्कृति की भूमिका पर चर्चा हुई। पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह की पहल पर आयोजित संवाद में राजनीति, शिक्षा, कला, सांस्कृतिक संस्थानों और रचनात्मक उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और कलात्मक प्रतिभाओं को आर्थिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ना तथा कलाकारों के लिए रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता के नए अवसर तलाशना रहा।

CICD की संस्थापक-अध्यक्ष पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह ने सांस्कृतिक एवं रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भारत की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कलाकारों, नीति निर्माताओं और संबंधित मंत्रालयों के बीच व्यापक संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता को संस्कृति से अलग करके नहीं देखा जा सकता, क्योंकि सांस्कृतिक जड़ें ही उसे वास्तविक अर्थ प्रदान करती हैं। कार्यक्रम की शुरुआत ‘इंडिया, कल्चर एंड सोसाइटी’ विषय पर उद्घाटन सत्र से हुई, जिसमें लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज, राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा और डॉ. सोनल मानसिंह ने भारतीय समाज, सांस्कृतिक पहचान, मूल्यों और राष्ट्रीय आकांक्षाओं में कला की भूमिका पर विचार रखे। इस दौरान स्कूली विद्यार्थियों द्वारा तैयार डॉ. सोनल मानसिंह की कला यात्रा पर आधारित चित्रों से सजी पुस्तक ‘रिदम ऑफ अ लाइफटाइम’ का विमोचन भी किया गया।

संवाद के पहले सत्र में शिक्षा, पर्यटन, कूटनीति और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में संस्कृति की भूमिका पर चर्चा हुई। सत्र का संचालन ऋषिहुड यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर ह्यूमन साइंसेज के निदेशक डॉ. संपदानंद मिश्रा ने किया। इसमें इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के अध्यक्ष श्याम सरन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, संस्कार भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री अभिजीत गोखले, अनुराग भदौरिया, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी और संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव लिली पांडेया सहित अन्य वक्ताओं ने हिस्सा लिया। चर्चा में संस्कृति को केवल विरासत के संरक्षण तक सीमित न रखकर शिक्षा, सामाजिक जीवन, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान मजबूत करने के माध्यम के रूप में विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया गया।

दूसरे सत्र में नई पीढ़ी को कला और संस्कृति से जोड़ने के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें उत्सवों, हस्तशिल्प, खानपान, प्रदर्शन कलाओं, पर्यटन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को अधिक लोगों तक पहुंचाने पर चर्चा की गई। रंगमंच एवं फिल्म अभिनेता और दिल्ली म्यूजिक सोसाइटी के अध्यक्ष सुनीत टंडन के संचालन में आयोजित इस सत्र में पद्म भूषण राजीव सेठी, पद्म श्री से सम्मानित समकालीन कलाकार परेश मैती और फिल्मकार विवेक रंजन अग्निहोत्री शामिल हुए। वहीं, तीसरे सत्र में सांस्कृतिक एवं रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कौशल विकास, उद्यमिता, बुनियादी ढांचे, बौद्धिक संपदा अधिकार, निवेश और सरकारी नीतियों की भूमिका पर चर्चा हुई। डॉ. (प्रो.) रमेश सी. गौर के संचालन में आयोजित इस सत्र में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. मांडवी सिंह, इंटेलेकैप के पार्टनर एवं प्रबंध निदेशक जयेश भाटिया, कॉस्ट्यूम डिजाइनर एवं क्यूरेटर संध्या रमन तथा जेटलाइन ग्रुप ऑफ कंपनीज और जेटसिंथेसिस के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राजन नवानी ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने कलाकारों को बेहतर प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और निवेश उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई, ताकि वे अपनी प्रतिभा को उद्यम में बदलकर स्थायी आजीविका हासिल कर सकें।

कार्यक्रम के समापन पर संस्कृति को राष्ट्रीय संपदा के रूप में पहचान दिलाने, कलाकारों के लिए रोजगार एवं आर्थिक अवसर बढ़ाने और रचनात्मक गतिविधियों को देश के विकास से जोड़ने पर जोर दिया गया। संवाद में सामने आए सुझावों को आगे की पहलों में बदलने के लिए नीति निर्माण, शिक्षा, कौशल विकास, वित्त पोषण, निवेश और विभिन्न क्षेत्रों के बीच साझेदारी से संबंधित प्राथमिकताओं पर आधारित कार्ययोजना दस्तावेज तैयार करने का प्रस्ताव भी रखा गया। कार्यक्रम को दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर का सहयोग मिला। गौरतलब है कि CICD की स्थापना वर्ष 1977 में डॉ. सोनल मानसिंह ने नई दिल्ली में की थी। संस्था पिछले करीब पांच दशकों से भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी के कलाकारों को तैयार करने में योगदान दे रही है। स्वर्ण जयंती समारोह के तहत आयोजित स्वर्णिका संवाद ने भारतीय कला एवं संस्कृति को विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य से जोड़ते हुए रचनात्मक क्षेत्र में रोजगार, निवेश और नीतिगत विकास की संभावनाओं पर विचार-विमर्श के लिए मंच प्रदान किया।


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