New Delhi News (26/10/2026): श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक को संस्कृत शिक्षा के विकास, भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शैक्षणिक नेतृत्व के लिए प्रतिष्ठित ‘कुलपति शिरोमणि सम्मान’ से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान 22 अक्टूबर 2026 को राजस्थान के जसवंतगढ़ स्थित सेठ श्री सूरजमल तापड़िया आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित ‘अखिल भारतीय कुलगुरु सम्मान समारोह–2026’ में प्रदान किया गया।
यह समारोह भारतीय संस्कृति और संस्कृत शिक्षा के प्रति समर्पित एम. पी. तापड़िया के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित किया गया। यज्ञसम्राट स्वामी प्रखर जी महाराज की पावन सन्निधि में आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े कुलगुरुओं और विद्वानों को भी सम्मानित किया गया। प्रो. पाठक को मिला यह सम्मान संस्कृत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने और उच्च शिक्षा में अकादमिक गुणवत्ता को प्रोत्साहित करने के उनके प्रयासों की पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
NAAC से A++ ग्रेड मिलने में विश्वविद्यालय की उपलब्धि
प्रो. मुरलीमनोहर पाठक के नेतृत्व में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से A++ ग्रेड प्राप्त किया है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, संस्थागत व्यवस्था और उच्च शिक्षा के निर्धारित मानकों के अनुरूप विकास की दिशा में किए गए प्रयासों को रेखांकित करती है।
विश्वविद्यालय में शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने, अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और संस्थागत विकास को गति देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। A++ ग्रेड प्राप्त करना विश्वविद्यालय के लिए महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे संस्कृत शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित अध्ययन एवं अनुसंधान को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के व्यापक परिप्रेक्ष्य में आगे बढ़ाने की दिशा में भी अवसर मजबूत होते हैं।
शोध, नवाचार और अकादमिक गुणवत्ता पर जोर
वर्तमान समय में उच्च शिक्षा का दायरा केवल पारंपरिक शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मौलिक शोध, नवाचार, ज्ञान का विस्तार और बदलती शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रमों का विकास भी शामिल है। इसी संदर्भ में संस्कृत, वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन और प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान की परंपराओं को आधुनिक अकादमिक विमर्श से जोड़ना महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय के विकास से जुड़े प्रयासों में शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान और संस्थागत सुदृढ़ीकरण को प्रमुख स्थान दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में प्रगति का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ भारतीय ज्ञान-संपदा के विभिन्न पक्षों के अध्ययन को प्रोत्साहित करना है।
प्रो. पाठक को प्रदान किया गया ‘कुलपति शिरोमणि सम्मान’ इसी व्यापक शैक्षणिक परिप्रेक्ष्य में संस्कृत शिक्षा और भारतीय बौद्धिक विरासत के प्रति उनके नेतृत्व एवं प्रतिबद्धता को सम्मानित करता है।

भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान
संस्कृत भारतीय सभ्यता की दार्शनिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का महत्त्वपूर्ण आधार रही है। वेद, उपनिषद, भारतीय दर्शन और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान से संबंधित ग्रंथों में निहित ज्ञान को संरक्षित करना, उसका शोधपरक अध्ययन करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना संस्कृत से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
इसके साथ ही, प्राचीन ज्ञान परंपराओं की समकालीन प्रासंगिकता को समझना और उन्हें वर्तमान शैक्षणिक एवं सामाजिक संदर्भों से जोड़ना भी आवश्यक है। इस दिशा में विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल ज्ञान के प्रसार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे अनुसंधान, सांस्कृतिक समझ और बौद्धिक विमर्श को भी आगे बढ़ाते हैं।
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का शैक्षणिक दृष्टिकोण संस्कृत अध्ययन के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के व्यापक उद्देश्य से जुड़ा है। ऐसे में कुलपति को मिला यह सम्मान विश्वविद्यालय की शैक्षणिक पहचान और संस्कृत शिक्षा के महत्त्व को भी सामने लाता है।
विश्वविद्यालय परिवार ने दी बधाई
‘कुलपति शिरोमणि सम्मान’ मिलने पर श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के परिवार ने प्रो. मुरलीमनोहर पाठक को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। विश्वविद्यालय परिवार ने आशा व्यक्त की कि उनके मार्गदर्शन में संस्थान संस्कृत शिक्षा, वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, शोध और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में आगे भी नई उपलब्धियां हासिल करेगा।
विश्वविद्यालय के लिए यह अवसर व्यक्तिगत सम्मान के साथ संस्थागत गौरव से भी जुड़ा है। NAAC से A++ ग्रेड की उपलब्धि और ‘कुलपति शिरोमणि सम्मान’ ने एक बार फिर संस्कृत शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान की संभावनाओं और भारतीय ज्ञान-विरासत को व्यापक शैक्षणिक मंच प्रदान करने के महत्त्व को रेखांकित किया है।
विश्वविद्यालय परिवार ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में संस्थान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक जगत में अपनी पहचान को और मजबूत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के अपने प्रयास जारी रखेगा।
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