सौरभ दास और आशुतोष रांका की बढ़ी मुकिलें, जंतर-मंतर प्रकरण की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (20 October 2026): सौरभ दास (Saurabh Das) और आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) से जुड़े जंतर-मंतर (Jantar Mantar) प्रवेश मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की जांच अब क्राइम ब्रांच (Crime Branch) को सौंप दी गई है। इससे दोनों नेताओं की कानूनी मुश्किलें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए और बढ़ा दी है। अब क्राइम ब्रांच मामले से जुड़े तथ्यों, परिस्थितियों और कथित उल्लंघनों की जांच करेगी।
मामला जंतर-मंतर पर कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद सौरभ दास और आशुतोष रांका पर प्रतिबंध के बावजूद वहां प्रवेश करने का आरोप है। बताया गया है कि दोनों कथित तौर पर एक बंद गेट को फांदकर परिसर में दाखिल हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार किया। इसके बाद 13 अक्टूबर को दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अब मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने से इस प्रकरण में आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं।
क्राइम ब्रांच की जांच के दौरान मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि जांच एजेंसी इस प्रकरण में नया मामला दर्ज करने या दोनों से पूछताछ करने जैसे कदम उठा सकती है। हालांकि, इस संबंध में क्राइम ब्रांच की ओर से किसी नई प्राथमिकी या पूछताछ की आधिकारिक पुष्टि का उल्लेख नहीं है। दोनों पहले से न्यायिक हिरासत में हैं, ऐसे में आगे की कार्रवाई जांच एजेंसी के रुख और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
इस बीच, दिल्ली पुलिस की मांग पर विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी है। दोनों के वकील अभिक चिमनी (Abhik Chimni) के मुताबिक, पुलिस ने अदालत में दलील दी कि उनकी रिहाई से सार्वजनिक व्यवस्था और शांति प्रभावित होने का खतरा है। इसी आधार पर दोनों को हिरासत में रखने की आवश्यकता जताई गई। अदालत की ओर से हिरासत बढ़ाए जाने के बाद मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा का रूप ले लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्राइम ब्रांच जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।
बार एंड बेंच (Bar and Bench) की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायिक हिरासत बढ़ाने के दौरान विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने दोनों पर बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने को लेकर भी टिप्पणी की थी। अदालत ने कथित आचरण को कानून के प्रति अनादर से जोड़ते हुए भविष्य में शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका पर चिंता जताई। वहीं, सीजेपी (CJP) इस मामले में कानूनी सलाह लेने और अदालत के फैसले को चुनौती देने पर विचार कर रही है। फिलहाल, क्राइम ब्रांच को जांच सौंपे जाने के बाद आगे की कार्रवाई और संभावित कानूनी कदमों पर सभी की नजर रहेगी।
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