दिल्ली में फिर जहरीली हुई यमुना? बुराड़ी में हजारों मछलियों की मौत से हड़कंप

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (16 October 2026): राजधानी दिल्ली में यमुना नदी की सेहत को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बुराड़ी इलाके में यमुना किनारे बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां मिलने से स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने नदी के प्रदूषण और जलीय जीवों के अस्तित्व को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी में अचानक जहरीले प्रदूषकों की मात्रा बढ़ने, ऑक्सीजन की कमी और नदी के प्राकृतिक बहाव में गिरावट के कारण मछलियों की मौत हो सकती है। हालांकि, घटना की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। छठ पूजा से पहले सामने आए इस मामले ने नदी के पानी की गुणवत्ता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर राधे श्याम शर्मा ने मछलियों की सामूहिक मौत को पानी में अचानक जहरीले पदार्थों के पहुंचने का संभावित संकेत बताया है। उन्होंने आशंका जताई कि प्रदूषक तत्व जमीन में रिसकर भूजल को भी प्रभावित कर सकते हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा हो सकता है। वहीं, साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (SANDRP) के भीम सिंह रावत ने यमुना में पर्याप्त पानी के बहाव की कमी और औद्योगिक अपशिष्ट के निस्तारण पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक, हरियाणा के करनाल और पानीपत क्षेत्र से निकलने वाले नालों के जरिए बिना उपचारित रासायनिक अपशिष्ट नदी में पहुंचने की आशंका है। हालांकि, बुराड़ी में मछलियों की मौत का इन स्रोतों से सीधा संबंध अभी प्रमाणित नहीं हुआ है।

इस घटना को लेकर नई दिल्ली नेचर सोसाइटी ने भी सोशल मीडिया पर मरी हुई मछलियों की तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं। संगठन ने स्थानीय लोगों के उन आरोपों का उल्लेख किया है, जिनमें हरियाणा की ओर से नहरों के जरिए रासायनिक अपशिष्ट छोड़े जाने की आशंका जताई गई है। सोशल मीडिया पर 12 अक्टूबर को हुई कथित एसिड रेन और मछलियों की मौत के बीच संभावित संबंध को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, एसिड रेन को इस घटना का कारण मानने के लिए फिलहाल कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी के नमूनों की जांच, घुलित ऑक्सीजन के स्तर का आकलन और प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करके ही इस घटना की वास्तविक वजह स्पष्ट की जा सकती है।

छठ पूजा से पहले यमुना में मछलियों की मौत का मामला प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। पर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु नदी के किनारे पहुंचते हैं और कई स्थानों पर पानी में उतरकर पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसे में नदी के प्रदूषण का स्तर श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पर्यावरण विशेषज्ञों और संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि बिना उपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को नदी में गिरने से रोका जाए, संदिग्ध नालों की जांच कराई जाए और यमुना में पर्याप्त प्राकृतिक जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, प्रभावित क्षेत्र के पानी की तत्काल जांच कर उसके परिणाम सार्वजनिक करने की जरूरत है, ताकि प्रदूषण के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और छठ पूजा से पहले लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।


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