नई दिल्ली (19 फरवरी 2025): दिल्ली उच्च न्यायालय ने चांदनी चौक की बदहाल स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक विरासत है, जिसकी मूल अवधारणा को बचाने की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने इस क्षेत्र की अव्यवस्था और खराब रखरखाव को लेकर संबंधित एजेंसियों को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि केवल बैठकें आयोजित करना और फैसलों को लागू न करना पर्याप्त नहीं होगा। हाई कोर्ट ने दुकानदारों, सरकारी एजेंसियों और अन्य हितधारकों से सामूहिक प्रयास करने की अपील की और एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का सुझाव दिया, जो इस क्षेत्र के पुनर्विकास और रखरखाव की निगरानी करेगी।
अदालत ने चांदनी चौक सर्व व्यापार मंडल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार, नगर निगम, दिल्ली पुलिस, पीडब्ल्यूडी, यातायात पुलिस, शहरी विकास विभाग, शाहजहानाबाद पुनर्विकास निगम और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को इस मुद्दे पर समन्वित प्रयास करने का निर्देश दिया। याचिका में दावा किया गया था कि पुनर्विकास के बावजूद क्षेत्र की हालत दयनीय बनी हुई है। इसमें अतिक्रमण, गंदगी, अवैध वेंडिंग, बेघर और नशेड़ियों की बढ़ती संख्या, आवारा पशुओं की समस्या और अनियमित रिक्शों की वजह से होने वाली यातायात अव्यवस्था जैसे मुद्दों को उठाया गया था। हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में तय की है और तब तक सभी एजेंसियों से प्रभावी समाधान की योजना प्रस्तुत करने को कहा है।।
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