दिल्ली में 54 गुना बढ़ा आरक्षित वन क्षेत्र, रिज की 5,363 हेक्टेयर जमीन को मिलेगा कानूनी संरक्षण

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (04 October 2026): दिल्ली में पर्यावरण और हरित क्षेत्र को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी में आरक्षित वन क्षेत्र का दायरा करीब 54 गुना बढ़ गया है। दिल्ली सरकार के नए आंकड़ों के मुताबिक, पिछली सरकारों के दौरान जहां महज 96.16 हेक्टेयर जमीन को आरक्षित वन के तौर पर अधिसूचित किया गया था, वहीं मौजूदा सरकार के कार्यकाल में यह क्षेत्र बढ़कर 5,267.009 हेक्टेयर हो गया है। अब उत्तरी रिज की 112.328 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन को भी आरक्षित वन के रूप में अधिसूचित किया जा रहा है। इसके बाद दिल्ली में आरक्षित वन का कुल क्षेत्रफल 5,363.169 हेक्टेयर यानी करीब 13,252 एकड़ हो जाएगा।

सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर दिल्ली रिज और राजधानी के अन्य वन क्षेत्रों पर पड़ेगा। दिल्ली रिज को शहर के हरित आवरण, भूजल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार पहले ही दक्षिणी रिज की करीब 400 हेक्टेयर यानी लगभग 1,000 एकड़ अतिरिक्त जमीन को आरक्षित वन के दायरे में लाने की मंजूरी दे चुकी है। अब उत्तरी रिज की जमीन को भी इसमें शामिल किए जाने से राजधानी के बड़े हिस्से को वन संरक्षण के कानूनी दायरे में लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

आरक्षित वन घोषित होने के बाद संबंधित जमीन पर वन कानूनों के तहत अधिक कड़ा संरक्षण लागू होता है। इसका मतलब है कि इन इलाकों में अतिक्रमण, अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई जैसी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई का कानूनी आधार और मजबूत होगा। दिल्ली सरकार का कहना है कि रिज की अधिक से अधिक जमीन को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने से राजधानी के प्राकृतिक हरित क्षेत्रों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। इससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और दिल्ली के वन क्षेत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में भी मजबूती मिलेगी।

हालांकि, आरक्षित वन क्षेत्र बढ़ाने के साथ सबसे बड़ी चुनौती इन जमीनों पर वास्तविक संरक्षण सुनिश्चित करने की होगी। सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में जमीन को आरक्षित वन घोषित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जमीन पर मौजूद अतिक्रमण की निगरानी, अवैध निर्माण पर कार्रवाई और पेड़ों की सुरक्षा भी जरूरी होगी। खासतौर पर दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में रिज की जमीन पर लगातार दबाव बना रहता है। ऐसे में सरकार के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि अधिसूचित वन क्षेत्र वास्तव में जमीन पर भी सुरक्षित रहें।

कुल मिलाकर, दिल्ली में आरक्षित वन क्षेत्र का करीब 54 गुना विस्तार राजधानी के पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। उत्तरी और दक्षिणी रिज की अतिरिक्त जमीन को संरक्षण के दायरे में लाने से दिल्ली के हरित क्षेत्र को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और अतिक्रमण तथा अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सरकार इस बढ़े हुए वन क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित करती है और क्या रिज की जमीन पर मौजूद अतिक्रमण को हटाने के लिए भी प्रभावी कार्रवाई होती है।


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