दिल्ली के 650 करोड़ के मेडिकल खरीद घोटाले में तीन अधिकारियों पर चलेगा केस, सरकार ने दी अभियोजन की मंजूरी

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (30 September 2026): दिल्ली सरकार के अस्पतालों में दवाओं, सर्जिकल उपकरणों, मरीजों की चादरों, एक्स-रे और एनेस्थीसिया से जुड़े उपकरणों की खरीद में कथित 650 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में अब कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) की जांच के बाद दिल्ली सरकार ने तीन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। इनमें सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के तत्कालीन प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा, तत्कालीन महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. वत्सला अग्रवाल और लेखा विभाग के अधिकारी नीरज चोपड़ा शामिल हैं।

इस मामले में ACB ने सबसे पहले 18 जून को डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, आपूर्तिकर्ताओं की ओर से आने वाले दस्तावेज और रेट फिक्सिंग से संबंधित फाइलें उनके पास आती थीं और इन्हें टेंडर कमेटी के सामने रखा जाता था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और जुलाई में तत्कालीन DGHS डॉ. वत्सला अग्रवाल तथा लेखा विभाग के अधिकारी नीरज चोपड़ा को भी गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों पर खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर उनकी भूमिका की जांच की गई।

जांच के दौरान डॉ. वत्सला अग्रवाल पर आरोप लगाया गया कि DGHS के पद पर रहते हुए उन्हें खरीद प्रक्रिया में हो रही कथित अनियमितताओं की जानकारी थी, इसके बावजूद संबंधित फाइलों को आगे बढ़ने दिया गया। वहीं, नीरज चोपड़ा पर आपत्तियों के बावजूद कथित तौर पर अवैध भुगतानों की प्रक्रिया को मंजूरी देने का आरोप है। ACB ने इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए दिल्ली सरकार से अभियोजन की अनुमति मांगी थी, जिसे अब सरकार की ओर से स्वीकृति दे दी गई है।

मामले की जांच में निजी क्षेत्र से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आई है। पिछले सप्ताह कथित तौर पर इस मामले के मुख्य सूत्रधार बताए जा रहे निजी फार्मा वितरक राजीव कुमार रंगीला ने आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद ACB ने उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी की ओर से उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किए जाने और कानूनी कार्रवाई बढ़ने के बीच उसके आत्मसमर्पण की बात सामने आई। पूछताछ के बाद उसे अदालत के समक्ष पेश किया गया और बुधवार को तिहाड़ जेल भेज दिया गया।

अब तीनों सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद 650 करोड़ रुपये की कथित चिकित्सा उपकरण एवं सामग्री खरीद अनियमितता मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा। ACB की जांच में सामने आए आरोपों के आधार पर यह मामला दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की खरीद प्रक्रिया और उससे जुड़े अधिकारियों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।


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