ज्ञानेश कुमार: भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त

टेन न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली (18 फरवरी 2025): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने ज्ञानेश कुमार को भारत के अगले मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के रूप में नियुक्त किया है। वह राजीव कुमार का स्थान लेंगे, जो 65 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद मंगलवार को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

राजीव कुमार का कार्यकाल और नई नियुक्ति

राजीव कुमार ने मई 2022 में मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान 2024 के लोकसभा चुनाव और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न हुए। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाता भागीदारी को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद अब ज्ञानेश कुमार भारत के चुनाव आयोग का नेतृत्व करेंगे।

नियुक्ति पर विवाद

हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने सरकार से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में लंबित याचिका पर सुनवाई होने तक नियुक्ति प्रक्रिया को टाल दिया जाए। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस चयन प्रक्रिया की आलोचना की और कहा कि सरकार ने चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को बाहर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखने के बजाय उसे अपने नियंत्रण में रखना चाहती है।

कौन हैं ज्ञानेश कुमार?

ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं और केरल कैडर से आते हैं। वह पहले संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में सचिव रह चुके हैं। गृह मंत्रालय में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के समय जम्मू-कश्मीर मामलों को संभालने में भी उन्होंने अहम योगदान दिया। केरल में भी विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं, जैसे कि एर्नाकुलम जिले के कलेक्टर और केरल राज्य सहकारी बैंक के एमडी। उन्होंने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। इसके अलावा, उन्होंने ICFAI से बिजनेस फाइनेंस और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पर्यावरण अर्थशास्त्र की पढ़ाई की है। 15 मार्च 2024 को उन्हें चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था और उनके साथ उत्तराखंड कैडर के सुखबीर संधू को भी चुनाव आयोग में शामिल किया गया था।

ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वह भारत की चुनावी प्रक्रिया को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं और किस तरह की नई पहल करते हैं।

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