राहुल गांधी का UPI पर प्रस्तावित MDR को लेकर केंद्र पर निशाना, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (16 September 2026): कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने UPI पेमेंट पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सरकार से इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत चार्ज लगाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा, बल्कि संबंधित कंपनी या दुकानदार पर लागू होगा। कांग्रेस इस प्रस्ताव का विरोध कर रही है।
राहुल गांधी ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए सरकार पर अमेरिकी दबाव के सामने झुकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि UPI पर शुल्क लगाने का असर अंततः आम लोगों पर पड़ सकता है। राहुल ने प्रधानमंत्री से इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में कदम पीछे खींचना चाहिए। इससे पहले भी राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI लेन-देन पर MDR लगाए जाने की संभावना का मुद्दा उठाया था।
राहुल गांधी ने दावा किया कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेन-देन की संख्या कुल लेन-देन का करीब 5 प्रतिशत है, लेकिन इनका कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में हिस्सा लगभग 65 प्रतिशत है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि शुल्क ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा और दुकानदार पर लगाया जाएगा, तो उसका असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के जरिए ग्राहकों तक पहुंच सकता है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की आर्थिक नीति और UPI के संचालन के खर्च से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।
कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया है कि UPI के संचालन के लिए सालाना करीब 20,700 करोड़ रुपये की जरूरत बताई जा रही है। पार्टी ने RBI के सरकार को किए गए सरप्लस ट्रांसफर, बैंकों के मुनाफे और NPCI की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि UPI को वित्तपोषित करने के लिए MDR लगाने की जरूरत क्यों पड़ रही है। ये आंकड़े और दावे कांग्रेस की ओर से रखे गए हैं और इन पर सरकार तथा अन्य संबंधित पक्षों का पक्ष अलग हो सकता है।
इस बीच UPI पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां कांग्रेस इसे लेकर सरकार से स्पष्टीकरण और प्रस्ताव वापस लेने की मांग कर रही है, वहीं इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से यह कहा गया है कि UPI भुगतान पर ग्राहक से सीधे शुल्क लेने की बात नहीं है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत शुल्क का दायरा मर्चेंट लेन-देन से जुड़ा है। ऐसे में आगे की चर्चा मुख्य रूप से शुल्क की दर, इसके वास्तविक असर और व्यापारियों व उपभोक्ताओं पर संभावित प्रभाव को लेकर रहने वाली है।
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