Greater Noida Authority Board Meeting: श्रमिक आवास, नई सड़कों और कनेक्टिविटी समेत 7 बड़े फैसले

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (03/09/2026): ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में शहर के बुनियादी ढांचे, श्रमिकों की आवासीय जरूरतों, बेहतर कनेक्टिविटी, शिक्षा, आपदा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बोर्ड ने अप्रवासी श्रमिकों के लिए ईडब्ल्यूएस आवास और ट्रांजिट लेबर हॉस्टल बनाने, सेक्टर अल्फा-1 में सार्वजनिक पुस्तकालय विकसित करने, ग्रेटर नोएडा को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ने तथा रिठौरी में फुटओवर ब्रिज बनाने समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी दी।

बैठक में आवासीय भूखंडों पर निर्माण पूरा करने के लिए आवंटियों को 30 जून 2028 तक अंतिम अवसर देने, एनडीआरएफ के क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्र के लिए 30 फ्लैट निशुल्क उपलब्ध कराने और शहर की सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग व्यवस्था को मजबूत करने का भी फैसला लिया गया।

श्रमिकों के लिए ईडब्ल्यूएस आवास और ट्रांजिट हॉस्टल को मंजूरी

ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अप्रवासी श्रमिकों के लिए प्राधिकरण ने आवास से जुड़े दो अहम फैसले किए हैं। पतवाड़ी और बिरौंडी गांव में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस श्रमिक आवास विकसित किए जाएंगे। रोजगार की तलाश में अलग-अलग जिलों और राज्यों से बड़ी संख्या में श्रमिक ग्रेटर नोएडा पहुंचते हैं। लंबे समय तक शहर में रहने के बावजूद महंगे निजी आवास और बिल्डर फ्लैट उनकी पहुंच से बाहर रहते हैं। इसके चलते कई श्रमिक अनधिकृत कॉलोनियों में रहने या अपनी बचत वहां लगाने को मजबूर होते हैं।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए पतवाड़ी और बिरौंडी में ईडब्ल्यूएस फ्लैट बनाने के लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 2026 के अंत तक निर्माण शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना का उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिवारों को सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराना है।

इसके साथ ही ईकोटेक-06 और ईकोटेक-11 में 3,000-3,000 वर्ग मीटर भूमि ट्रांजिट लेबर हॉस्टल के लिए चिन्हित की गई है। इन भूखंडों को प्राधिकरण श्रम विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करेगा, जबकि हॉस्टल का निर्माण श्रम विभाग द्वारा किया जाएगा।

यह व्यवस्था खासतौर पर उन श्रमिकों के लिए उपयोगी होगी जो रोजगार की तलाश में पहली बार ग्रेटर नोएडा आते हैं। उन्हें महंगे होटल या अस्थायी आवास पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और कम किराये में हॉस्टल की सुविधा मिल सकेगी। रोजगार मिलने के बाद वे स्थायी आवास की तलाश कर सकेंगे।

सेक्टर अल्फा-1 में बनेगी तीन मंजिला सार्वजनिक लाइब्रेरी

शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी बोर्ड बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। सेक्टर अल्फा-1 में 1,360 वर्ग मीटर क्षेत्रफल पर सार्वजनिक पुस्तकालय विकसित किया जाएगा। कुल क्षेत्रफल में से करीब 440 वर्ग मीटर में तीन मंजिला लाइब्रेरी बनाई जाएगी। शेष हिस्से में पार्किंग, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

पुस्तकालय में बच्चों, छात्रों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग-अलग जरूरतों के अनुरूप किताबें उपलब्ध कराने की योजना है। खासतौर पर ऐसे विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा जो महंगी किताबें खरीदने में सक्षम नहीं हैं। वे न्यूनतम शुल्क पर पुस्तकें लेकर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे। इस परियोजना का निर्माण भी 2026 के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

ग्रेटर नोएडा, नोएडा और यीडा सिटी की दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी होगी मजबूत

ग्रेटर नोएडा की कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए 130 मीटर चौड़ी सड़क को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (एनएच-24) से जोड़ने की योजना को भी बोर्ड ने मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत पहले चरण में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से एक मूर्ति तक डबल डेकर सड़क विकसित की जाएगी। इसकी अनुमानित लागत 756.01 करोड़ रुपये है। परियोजना के दूसरे चरण में शेष हिस्से का निर्माण किया जाएगा।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी एनएचएआई को दी थी। सर्वे के दौरान दो संभावित मार्ग सामने आए थे। इनमें एक मूर्ति से नाले तक डबल डेकर सड़क और शाहबेरी से नाले के किनारे लिंक रोड का विकल्प शामिल था।

समिति ने पहले चरण में एक मूर्ति तक डबल डेकर सड़क बनाने को प्राथमिकता दी है। परियोजना की लागत यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद प्राधिकरण के बीच समान रूप से बांटी जाएगी। इस सड़क के बनने से ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक पहुंचेगी 105 मीटर चौड़ी सड़क

बोर्ड ने ग्रेटर नोएडा से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) तक 105 मीटर चौड़ी सड़क विकसित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। ग्रेटर नोएडा फेस-1 में इस प्रस्तावित सड़क का करीब 6 किलोमीटर हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका है। अब फेस-2 में ग्राम जुनपत से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक लगभग 12 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। इस मार्ग में रेलवे लाइन, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लिंक लाइन और जीटी रोड पड़ेंगे। इन स्थानों पर तीन ओवरब्रिज बनाए जाने का प्रस्ताव है। सड़क को 10 लेन और चार सर्विस लेन के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना के लिए आवश्यक भूमि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण उपलब्ध कराएगा, जबकि सड़क के निर्माण की लागत एनएचएआई वहन करेगा। इस सड़क के दायरे में ग्रेटर नोएडा फेस-1, फेस-2 और डीएनजीआईआर क्षेत्र शामिल हैं। डीएनजीआईआर में आने वाली भूमि के अधिग्रहण की जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण की होगी। भूमि अधिग्रहण का खर्च नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 50:50 के अनुपात में वहन करेंगे। परियोजना पूरी होने के बाद ग्रेटर नोएडा के दोनों फेस के साथ डीएनजीआईआर क्षेत्र की ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

रिठौरी में रेलवे लाइन के ऊपर बनेगा फुटओवर ब्रिज

रिठौरी गांव के लोगों को रेलवे लाइन पार करने में हो रही परेशानी को देखते हुए फुटओवर ब्रिज निर्माण के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की पहल के लिए वर्ष 2022 में सांसद डॉ. महेश शर्मा की ओर से प्राधिकरण को पत्र भेजा गया था। इसके बाद प्राधिकरण ने डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। दोनों विभागों की संयुक्त टीम ने मौके का निरीक्षण करने के बाद फुटओवर ब्रिज के निर्माण पर सहमति जताई। इसका निर्माण ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कराएगा। रेलवे लाइन के ऊपर निर्माण के लिए रेलवे से आवश्यक स्वीकृति और एनओसी ली जाएगी। ब्रिज में रैंप, सीढ़ियां और लिफ्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

आवासीय भूखंडों पर निर्माण के लिए 30 जून 2028 तक अंतिम मौका

ग्रेटर नोएडा की आवासीय भूखंड योजनाओं के ऐसे आवंटियों को राहत दी गई है, जिन्होंने अभी तक अपने भूखंड पर निर्माण पूरा नहीं किया है या कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया है। बोर्ड ने ऐसे आवंटियों को 30 जून 2028 तक अतिरिक्त समय देने को मंजूरी दी है। यह समय विस्तार वर्तमान में लागू विलंब शुल्क के साथ दिया जाएगा। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि के भीतर निर्माण पूरा कर कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं करने वाले आवंटियों के मामले में आवंटन रद्द किया जा सकता है। इसे इस श्रेणी के आवंटियों के लिए अंतिम अवसर के तौर पर देखा जा रहा है।

एनडीआरएफ को ओमीक्रॉन-1ए में 30 फ्लैट निशुल्क मिलेंगे

आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों को और तेज करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एनडीआरएफ के क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्र के लिए 30 फ्लैट निशुल्क आवंटित करने का निर्णय लिया है। ये आवास सेक्टर ओमीक्रॉन-1ए में एनडीआरएफ की 8वीं वाहिनी, गाजियाबाद के रीजनल रेसपोंस सेंटर के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें टाइप-2 और टाइप-3 श्रेणी के फ्लैट शामिल होंगे।

इन फ्लैटों का उपयोग सामान्य पारिवारिक आवास के तौर पर नहीं, बल्कि आपदा के समय तत्काल प्रतिक्रिया देने वाली टीम के कैंप, परिसर और स्टाफ कार्यालय के रूप में किया जाएगा। एनडीआरएफ की टीम रोटेशन के आधार पर तैनात रहेगी। इस व्यवस्था से बाढ़, औद्योगिक दुर्घटना, भवन गिरने और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में राहत-बचाव टीम की त्वरित तैनाती में मदद मिलने की उम्मीद है।

मैकेनिकल स्वीपिंग से सड़कों की सफाई व्यवस्था होगी मजबूत

शहर में धूल-मिट्टी को नियंत्रित करने और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए ग्रेटर नोएडा में मैकेनिकल रोड स्वीपिंग व्यवस्था को भी विस्तार दिया गया है। सीएक्यूएम और आईआईटी रुड़की की सिफारिशों के आधार पर ग्रेटर नोएडा के सेंट्रल और ईस्ट जोन में सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग पांच वर्षों तक कराई जाएगी। प्राधिकरण मशीनरी उपलब्ध कराएगा, जबकि मशीनों के संचालन, रखरखाव और संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी चयनित कॉन्ट्रैक्टर की होगी। आईआईटी रुड़की द्वारा तैयार एस्टीमेट के आधार पर दोनों जोन के लिए टेंडर जारी किए गए थे और कॉन्ट्रैक्टर का चयन किया जा चुका है।

सेंट्रल जोन में ईटा-1, डेल्टा-1, डेल्टा-2, डेल्टा-3, केपी-4, जीटा-1, ईटा-2, बेगमपुर, बोड़ाकी, मकौड़ा, मलकपुर, मुबारकपुर, पाली, साकीपुर और लखनावली समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। वहीं ईस्ट जोन में सेक्टर-36, 37, म्यू-1, ज्यू-1, 2 और 3, चाई-5 के अलावा अस्तौली, डाबरा, चुहड़पुर, घरबरा, घोड़ी-बछेड़ा, जुनपत, जुनैदपुर, घंघोला, देवला, अजायबपुर, अटाई मुरादपुर, दाउदपुर, खेरली, लड़पुरा, लुक्सर, मायचा, कनारसी, कासना, खानपुर, पौवारी, सलेमपुर गुर्जर, विरौंडी और विरौंडा सहित कई गांवों की सड़कें शामिल हैं।

बोर्ड बैठक में विकास और जनसुविधाओं पर रहा फोकस

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में लिए गए फैसलों से एक ओर जहां शहर की रीजनल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों, छात्रों, ग्रामीणों और आपदा प्रबंधन से जुड़ी जरूरतों को भी प्राथमिकता दी गई है।

बैठक में चेयरमैन दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार वर्चुअल माध्यम से, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस, एसीईओ प्रेरणा सिंह, एसीईओ सुमित यादव, यीडा के ओएसडी शैलेंद्र सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


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