जीडीपी अनुमानों पर सरकार ने दी सफाई, नई आंकड़ों को लेकर समझाया पूरा गणित
टेन न्यूज़ नेटवर्क
National News (02 September 2026): सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के जीडीपी अनुमानों को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने बताया कि 31 अगस्त 2026 को 2022-23 को आधार वर्ष मानकर जीडीपी की नई वार्षिक और त्रैमासिक श्रृंखला जारी की गई थी। इसमें नए उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI), बैंकिंग सेवा मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला और विभिन्न प्रशासनिक स्रोतों से मिले अपडेटेड आंकड़ों को शामिल किया गया है। मंत्रालय ने विशेष रूप से दोहरी अपस्फीति पद्धति, नकारात्मक अंतर्निहित जीवीए डिफ्लेटर, जीडीपी और अन्य मूल्य सूचकांकों के अंतर तथा उत्पादन एवं व्यय पक्ष से प्राप्त अनुमानों के बीच अंतर को लेकर स्पष्टीकरण दिया है।
विनिर्माण क्षेत्र में -1.5 प्रतिशत के नकारात्मक अंतर्निहित जीवीए डिफ्लेटर को लेकर मंत्रालय ने कहा कि इसका अर्थ विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में गिरावट होना नहीं है। दोहरी अपस्फीति पद्धति में उत्पादन और मध्यवर्ती उपभोग को अलग-अलग कीमतों से समायोजित कर वास्तविक जीवीए निकाला जाता है। यदि इनपुट कीमतें उत्पादन कीमतों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती हैं तो नाममात्र जीवीए की वृद्धि वास्तविक जीवीए की तुलना में कम हो सकती है। मंत्रालय के अनुसार, 2026-27 की पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र की नाममात्र जीवीए वृद्धि 7.7 प्रतिशत, जबकि वास्तविक जीवीए वृद्धि 9.2 प्रतिशत रही, जिससे -1.5 प्रतिशत का अंतर्निहित डिफ्लेटर सामने आया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह उत्पादन कीमतों में गिरावट का संकेत नहीं है, बल्कि उत्पादन और इनपुट कीमतों की सापेक्ष गति को दर्शाता है।
जीडीपी के पिछले साल के आंकड़े 86.05 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 80 लाख करोड़ रुपये होने पर भी मंत्रालय ने सफाई दी है। सरकार के मुताबिक यह बदलाव चालू वर्ष की विकास दर को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए नहीं किया गया, बल्कि आधार वर्ष बदलने, नए डेटा स्रोतों, बेहतर पद्धतियों और अपडेटेड संकेतकों को शामिल करने के कारण हुआ। पुरानी 2011-12 आधार वर्ष वाली श्रृंखला में 2025-26 की पहली तिमाही की मौजूदा कीमतों पर जीडीपी 86.05 लाख करोड़ रुपये थी, जबकि नई 2022-23 आधार वर्ष श्रृंखला में यह आंकड़ा 80.32 लाख करोड़ रुपये हुआ। बाद में आंकड़ों के अपडेट के साथ यह 80.44 लाख करोड़ रुपये और फिर संशोधित होकर करीब 80 लाख करोड़ रुपये हुआ। मंत्रालय ने कहा कि अलग-अलग आधार वाली श्रृंखलाओं के आंकड़ों की सीधे तुलना करना उचित नहीं है।
मंत्रालय ने सीपीआई, डब्ल्यूपीआई और जीडीपी डिफ्लेटर के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया है। सीपीआई घरेलू उपभोग की वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को मापता है, जबकि डब्ल्यूपीआई मुख्य रूप से थोक वस्तुओं, कच्चे माल और निर्मित उत्पादों की कीमतों को दर्शाता है तथा इसमें सेवाएं शामिल नहीं होतीं। इसके विपरीत जीडीपी डिफ्लेटर पूरी अर्थव्यवस्था के मूल्य परिवर्तन का व्यापक संकेतक है, जिसमें सरकारी खर्च, निवेश, निर्यात तथा बैंकिंग, आईटी और रियल एस्टेट जैसी सेवाएं भी शामिल हैं। इसलिए मंत्रालय के अनुसार सीपीआई 3.9 प्रतिशत और डब्ल्यूपीआई 9 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद जीडीपी डिफ्लेटर करीब 2.5 प्रतिशत रहना अपने आप में विरोधाभास नहीं है, क्योंकि तीनों सूचकांकों की कवरेज और भार अलग-अलग हैं।
पीएफसीई यानी निजी अंतिम उपभोग व्यय को लेकर मंत्रालय ने कहा कि दोहरी अपस्फीति पद्धति सीधे तौर पर इसकी गणना में इस्तेमाल नहीं होती। दोहरी अपस्फीति उत्पादन पक्ष पर उद्योगों के जीवीए की गणना के लिए इस्तेमाल की जाती है, जहां उत्पादन और मध्यवर्ती उपभोग को अलग-अलग समायोजित किया जाता है। पीएफसीई अंतिम मांग का माप है और इसमें मध्यवर्ती उपभोग घटाने की जरूरत नहीं होती। मंत्रालय के अनुसार खाद्य एवं विनिर्मित वस्तुओं के लिए उपयुक्त मात्रा संकेतकों तथा उपभोक्ता मूल्य सूचकांकों का उपयोग किया जाता है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, रेस्तरां और आवास जैसी सेवाओं के लिए संबंधित उत्पादन संकेतकों और मूल्य सूचकांकों का इस्तेमाल किया जाता है।
खनन क्षेत्र में नाममात्र और वास्तविक जीवीए के बीच बड़े अंतर का कारण भी मंत्रालय ने बताया है। 2026-27 की पहली तिमाही में खनन एवं उत्खनन क्षेत्र के वास्तविक जीवीए में -2.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जो आईआईपी में खनन क्षेत्र की कमजोर वृद्धि से काफी हद तक मेल खाती है। हालांकि इसी अवधि में खनिजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई। कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में अप्रैल में 69.5 प्रतिशत, मई में 72.2 प्रतिशत और जून में 33.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि धातु अयस्कों में भी 20 प्रतिशत से अधिक की मुद्रास्फीति रही। इसके परिणामस्वरूप खनन क्षेत्र की नाममात्र जीवीए वृद्धि 22.3 प्रतिशत रही, जबकि वास्तविक जीवीए में गिरावट दर्ज हुई।
मंत्रालय ने जीडीपी के उत्पादन और व्यय पक्ष के अनुमानों के बीच मौजूद सांख्यिकीय अंतर को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। सरकार के मुताबिक यह अंतर अपने आप में जीडीपी के कम या ज्यादा आकलन का प्रमाण नहीं है। 2026-27 की पहली तिमाही के आंकड़े अभी उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित हैं और अधिक व्यापक एवं अपडेटेड डेटा मिलने पर इनमें संशोधन हो सकता है। हालांकि मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि मौजूदा सांख्यिकीय अंतर को देखकर यह पहले से तय नहीं किया जा सकता कि अगले संशोधन में जीडीपी बढ़ेगी या घटेगी अथवा कितना बदलाव होगा। अंतिम आंकड़े जारी होने तक उत्पादन और व्यय पक्ष से जुड़े नए आंकड़ों के आधार पर अनुमानों को समायोजित किया जाएगा और उम्मीद है कि अंतिम चरण में सांख्यिकीय अंतर काफी कम या समाप्त हो जाएगा।
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