Delhi SIR: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 33% नाम हटे, क्या है प्रमुख वजह?

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (01 September 2026): दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर बड़ा आंकड़ा सामने आया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47,56,722 नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। वहीं लगभग 97.5 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल में दर्ज किए गए हैं। इस तरह करीब 32.9 प्रतिशत मौजूदा मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर हो गए हैं, यानी लगभग हर तीन में से एक नाम फिलहाल सूची में नहीं है।

दिल्ली के आंकड़ों की तुलना पश्चिम बंगाल में हुई SIR प्रक्रिया के शुरुआती आंकड़ों से करें तो अंतर काफी बड़ा दिखाई देता है। पश्चिम बंगाल में SIR से पहले करीब 7.66 करोड़ मतदाता थे और शुरुआती ड्राफ्ट सूची में लगभग 58.2 लाख नाम हटाए गए थे, जो कुल मतदाताओं का करीब 7.6 प्रतिशत था। इसके मुकाबले दिल्ली में नाम हटाए जाने का अनुपात 32.9 प्रतिशत बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार दिल्ली में घर-घर सत्यापन अभियान के दौरान मौजूदा सूची के सभी 1,45,10,299 मतदाताओं को प्रक्रिया में शामिल किया गया था।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची से नाम हटने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति हमेशा के लिए मतदान के अधिकार से वंचित हो गया है। सत्यापन के दौरान जिन 47,56,722 लोगों के फॉर्म निर्धारित प्रक्रिया के तहत शामिल नहीं हो सके, उन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या अन्य निर्धारित श्रेणियों में रखा गया है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की बताई गई है, जो स्थायी रूप से अपना निवास स्थान बदल चुके हैं। अब पात्र मतदाताओं को अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए दावा दाखिल करने का अवसर दिया गया है।

निर्वाचन प्रक्रिया के तहत जिन पात्र लोगों का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके लिए निर्धारित घोषणा पत्र और जरूरी दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 जमा करना होगा। स्थायी रूप से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो चुके मतदाता नए पते वाले क्षेत्र में भी आवेदन कर सकते हैं। जन्मतिथि और निवास से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर आवेदन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

SIR की इस प्रक्रिया ने दिल्ली में मतदाता सूची की शुद्धता और बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन के जरिए मृत, स्थानांतरित और अनुपस्थित मतदाताओं के नामों की पहचान की गई है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने के कारण पात्र मतदाताओं के लिए दावा प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। अब 30 सितंबर तक दाखिल होने वाले दावों और आपत्तियों के बाद अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम वापस जुड़ते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।


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