New Delhi News (31 August 2026): दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के तहत तैयार ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली की मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज 1,45,10,299 वोटरों में से 47,56,722 नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं। इस तरह ड्राफ्ट सूची में करीब 97.53 लाख मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस आंकड़े को लेकर चुनाव आयोग पर तंज कसा और कहा कि SIR के जरिए देश की आबादी को 140 करोड़ से घटाकर 50 करोड़ तक किया जा सकता है।
SIR के तहत दिल्ली में 30 जून से 17 अगस्त 2026 तक घर-घर जाकर मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म जुटाने की प्रक्रिया चलाई गई। चुनाव आयोग के मुताबिक इस दौरान सभी मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाने का काम पूरा किया गया था। 17 अगस्त तक 97,53,577 मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म जमा हुए और उन्हें डिजिटाइज किया गया। वहीं, 47,56,722 मतदाताओं के फॉर्म जमा नहीं हो सके। चुनाव अधिकारियों ने इन लोगों को अनुपस्थित, दूसरी जगह चले गए, मृत, डुप्लिकेट और अन्य यानी ASDDO श्रेणी में रखा है। इसी वजह से इन नामों को मौजूदा ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया है।
ड्राफ्ट सूची सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया और इतने बड़े पैमाने पर नाम बाहर किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि दिल्ली में करीब डेढ़ करोड़ वोटरों में से 47 लाख के नाम गायब हैं। हालांकि, चुनाव आयोग की प्रक्रिया के अनुसार ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होना अंतिम रूप से मताधिकार समाप्त होना नहीं है। आयोग ने ऐसे मतदाताओं को अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया है, जिसके बाद दस्तावेजों और संबंधित दावों की जांच की जाएगी।
जिन मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, वे 30 सितंबर 2026 तक फॉर्म-6 और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना दावा पेश कर सकते हैं। इसके बाद चुनाव अधिकारियों की ओर से दावों और आपत्तियों की जांच की जाएगी। आयोग के शेड्यूल के मुताबिक नोटिस जारी करने, सुनवाई और दावों के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। ऐसे में जिन लोगों का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, उनके लिए समय सीमा के भीतर दावा करना बेहद महत्वपूर्ण होगा, ताकि जांच के बाद पात्र मतदाताओं का नाम अंतिम सूची में शामिल किया जा सके।
SIR के साथ दिल्ली में मतदान केंद्रों की संख्या में भी बड़ा बदलाव किया गया है। एक मतदान केंद्र पर अधिकतम मतदाताओं की संख्या 1,500 से घटाकर 1,200 किए जाने के कारण मतदान केंद्रों की संख्या 13,033 से बढ़कर 14,947 हो गई है। चुनाव आयोग के अनुसार सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को जारी की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक बहस के साथ-साथ आम मतदाताओं के बीच अपने नाम की जांच और जरूरी दस्तावेजों के साथ दावा दाखिल करने की प्रक्रिया भी तेज होने की संभावना है।
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