कम यात्री, ज्यादा खर्च… नोएडा में हाइड्रोजन बसों का ट्रायल क्यों हुआ बंद?

टेन न्यूज नेटवर्क

Noida News (29/08/2026): नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी में पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया हाइड्रोजन बसों का परीक्षण फिलहाल रोक दिया गया है। एक महीने के ट्रायल के लिए संचालित की गई तीन बसें 18 दिन बाद ही बंद कर दी गईं। परीक्षण के दौरान यात्रियों की संख्या उम्मीद से कम रही, जबकि संचालन और हाइड्रोजन ईंधन की लागत ई-बसों के मुकाबले अधिक पाई गई।

ट्रायल अवधि में तीनों बसों ने मिलकर करीब 17,444 किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान बसों के संचालन से जुड़े कुछ तकनीकी मुद्दे भी सामने आए। अब संबंधित विभाग इन समस्याओं का अध्ययन करने के साथ ट्रायल से मिले तकनीकी और आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण करेगा। इसके बाद आगे हाइड्रोजन बसों को चलाने को लेकर फैसला लिया जाएगा।

अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम यात्री संख्या और ज्यादा संचालन खर्च की रही। निर्धारित रूट पर बसें चलाने के बावजूद यात्रियों की अपेक्षित संख्या नहीं मिल सकी। वहीं, हाइड्रोजन ईंधन और अन्य परिचालन खर्च अधिक होने से इस मॉडल की आर्थिक व्यवहार्यता पर भी सवाल उठे हैं। ऐसे में फिलहाल इसे बड़े स्तर पर लागू करने के बजाय पहले इसकी कमियों और लागत का आकलन किया जा रहा है।

ग्रेटर नोएडा-आगरा रूट पर हो सकता है अगला परीक्षण

यमुना प्राधिकरण अब हाइड्रोजन बसों को छोटे रूट पर चलाने के बजाय लंबे कॉरिडोर पर परीक्षण करने की योजना पर विचार कर रहा है। इसके तहत ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच बसों के संचालन की तैयारी की जा रही है। लंबे रूट पर बस चलाने से ईंधन की खपत, माइलेज, तकनीकी प्रदर्शन और वास्तविक संचालन लागत का बेहतर मूल्यांकन किया जा सकेगा।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों की खासियत यह है कि इनके संचालन में पारंपरिक डीजल बसों की तरह धुआं नहीं निकलता। ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल से परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, नोएडा के परीक्षण से यह संकेत मिला है कि इस तकनीक को सफल बनाने के लिए पर्यावरणीय लाभ के साथ यात्रियों की पर्याप्त संख्या, ईंधन की उपलब्धता, तकनीकी विश्वसनीयता और किफायती संचालन भी जरूरी है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत देश में 70 हाइड्रोजन वाहनों को 21 रूट पर चलाने से जुड़ी 12 पायलट परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं में 27 बसें और 43 ट्रक शामिल हैं, जबकि 16 हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन प्रस्तावित हैं।


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