दिल्ली के स्कूलों में नौवीं की परीक्षा-पदोन्नति व्यवस्था बदली, तीसरी भाषा अनिवार्य

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (21 August 2026): दिल्ली के सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा नौवीं की परीक्षा और पदोन्नति व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। शिक्षा निदेशालय की संशोधित व्यवस्था के तहत अब विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा और व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य होगी। नौवीं के छह मुख्य विषयों में भाषा-1, भाषा-2, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और व्यावसायिक शिक्षा शामिल होंगे और इन्हीं के प्रदर्शन के आधार पर पदोन्नति तय की जाएगी।

तीसरी भाषा में फेल होने पर भी दसवीं में मिलेगा प्रवेश

नई व्यवस्था में तीसरी भाषा का मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर किया जाएगा और अंकतालिका में विद्यार्थी का परिणाम उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण के रूप में दर्ज होगा। हालांकि, तीसरी भाषा में असफल होने पर विद्यार्थी को नौवीं कक्षा में रोका नहीं जाएगा, यदि वह छह मुख्य विषयों में पदोन्नति की सभी शर्तें पूरी करता है। ऐसे विद्यार्थियों को दसवीं कक्षा में तीसरी भाषा की नौवीं की परीक्षा पास करनी होगी और दसवीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने से पहले तीसरी भाषा में उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा।

गणित-विज्ञान में उन्नत स्तर की परीक्षा का विकल्प

गणित और विज्ञान को लेकर भी नई व्यवस्था लागू होगी। नौवीं में दोनों विषयों की सामान्य परीक्षा 80 अंकों की और तीन घंटे की होगी। इच्छुक विद्यार्थी इसके साथ गणित उन्नत और विज्ञान उन्नत स्तर की अतिरिक्त 25-25 अंकों की एक-एक घंटे की परीक्षा दे सकेंगे। विद्यार्थी इनमें से एक या दोनों विषयों का उन्नत स्तर चुन सकते हैं। इन अतिरिक्त परीक्षाओं के अंक पदोन्नति या कुल परिणाम में शामिल नहीं किए जाएंगे। वहीं 2026-27 से गणित के आधारभूत और मानक स्तर की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी, हालांकि दसवीं के मौजूदा विद्यार्थियों को आधारभूत गणित चुनने का विकल्प मिलेगा।

कौशल, कला और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर जोर

नई व्यवस्था में कौशल, कला और स्वास्थ्य शिक्षा पर भी जोर दिया गया है। कक्षा नौवीं में व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य विषय होगी, जबकि व्यक्ति और समाज, कला शिक्षा तथा शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य का भी अध्ययन जरूरी होगा। इनका मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर किया जाएगा। इसके अलावा 2026-27 से कंप्यूटेशनल सोच और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े मॉड्यूल शुरू किए जाएंगे, जिन्हें 2027-28 से अनिवार्य विषय बनाया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ कौशल और आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।

पदोन्नति के लिए 33 प्रतिशत अंक जरूरी

पदोन्नति के लिए विद्यार्थियों को छह मुख्य विषयों के आंतरिक मूल्यांकन, प्रायोगिक और बाहरी मूल्यांकन में अलग-अलग कम से कम 33 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। वार्षिक परीक्षा में प्रत्येक मुख्य विषय में कम से कम 25 प्रतिशत अंक प्राप्त करना भी जरूरी होगा। विद्यार्थियों को अधिकतम 10 अनुग्रह अंक दिए जा सकेंगे। छह मुख्य विषयों में अधिकतम तीन विषयों में असफल विद्यार्थी अप्रैल के दूसरे या तीसरे सप्ताह में होने वाली पूरक परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। पूरक परीक्षा में अनुग्रह अंकों का लाभ नहीं मिलेगा और निर्धारित अवसरों के बाद भी सफल न होने वाले विद्यार्थियों को नौवीं कक्षा दोहरानी होगी।


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