Noida News (21/08/2026): नोएडा प्राधिकरण में विभिन्न विभागों और कार्यों में तैनात करीब 5,700 आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। शासन के निर्देश के बाद इन कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीसीओएस) की व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नई प्रणाली लागू होने के बाद कर्मचारियों की भर्ती से लेकर तैनाती, उपस्थिति, वेतन भुगतान और ईपीएफ-ईएसआई जैसी वैधानिक सुविधाओं का रिकॉर्ड एक केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम में दर्ज किया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और ठेकेदारों या एजेंसियों की मनमानी पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
शासन के आदेश के बाद शुरू हुआ डेटा जुटाने का काम
शासन की ओर से गुरुवार को नोएडा प्राधिकरण को नई व्यवस्था से संबंधित दिशा-निर्देश भेजे गए। आदेश मिलने के बाद प्राधिकरण ने अपने सभी 10 वर्क सर्किल से वहां कार्यरत अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों का विस्तृत ब्योरा मांगा है। संबंधित अधिकारियों को कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी निर्धारित प्रारूप में एकत्र कर 15 दिन के भीतर शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रक्रिया में कर्मचारियों की संख्या, तैनाती स्थल, कार्य की प्रकृति, संबंधित सेवा प्रदाता एजेंसी और अन्य आवश्यक विवरण जुटाए जा रहे हैं। डेटा तैयार होने के बाद इसे नई डिजिटल व्यवस्था में शामिल किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सिविल, सफाई, जल और वन विभाग में बड़ी संख्या में कर्मचारी
नोएडा प्राधिकरण के अलग-अलग विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सड़कों और सिविल कार्यों से लेकर सफाई व्यवस्था, जल आपूर्ति, हरियाली और वन क्षेत्र से जुड़े कार्यों तक में इन कर्मचारियों की सेवाएं ली जाती हैं।फिलहाल बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति अलग-अलग ठेकेदारों और सेवा प्रदाता एजेंसियों के माध्यम से की जाती है। अलग-अलग एजेंसियों के कारण कर्मचारियों के रिकॉर्ड, उपस्थिति और भुगतान की निगरानी कई स्तरों पर होती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य इसी प्रक्रिया को एकीकृत करना है।
भर्ती से वेतन तक डिजिटल निगरानी
यूपीसीओएस की प्रस्तावित व्यवस्था में कर्मचारियों से संबंधित प्रमुख जानकारियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज की जाएंगी। इसमें कर्मचारी की नियुक्ति, तैनाती, उपस्थिति, वेतन भुगतान और वैधानिक लाभों से संबंधित रिकॉर्ड शामिल रहेगा। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से यह पता लगाना भी आसान होगा कि कौन कर्मचारी किस विभाग या कार्यस्थल पर तैनात है और उसे कितना भुगतान किया जा रहा है। इसके साथ ही ईपीएफ और ईएसआई से संबंधित अंशदान की स्थिति भी ऑनलाइन रिकॉर्ड में उपलब्ध रहने की उम्मीद है।
समय पर वेतन और वैधानिक लाभ मिलने की उम्मीद
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर कर्मचारियों के वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर पड़ने की उम्मीद है। व्यवस्था के तहत आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों का वेतन बैंक खाते में समय पर भेजने और ईपीएफ-ईएसआई का निर्धारित अंशदान जमा कराने की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाएगा। इसके अलावा कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा, मातृत्व अवकाश और आकस्मिक अवकाश जैसी निर्धारित सुविधाओं का लाभ मिलने की व्यवस्था भी शामिल है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से कर्मचारी अपने वेतन और वैधानिक सुविधाओं से जुड़ी जानकारी अधिक आसानी से हासिल कर सकेंगे।
ठेकेदारों की भूमिका होगी सीमित, निगरानी तंत्र होगा मजबूत
अभी आउटसोर्स कर्मचारियों और प्राधिकरण के बीच सेवा प्रदाता एजेंसियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों के प्रबंधन, रिकॉर्ड और वैधानिक सुविधाओं की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जाएगी। इससे ठेकेदारों की भूमिका केवल निर्धारित कार्यों तक सीमित किए जाने की संभावना है। अधिकारियों का मानना है कि केंद्रीकृत व्यवस्था लागू होने से कर्मचारियों की संख्या और तैनाती का सही रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। साथ ही वेतन, ईपीएफ, ईएसआई अथवा अन्य सुविधाओं को लेकर सामने आने वाली शिकायतों की निगरानी भी पहले की तुलना में बेहतर तरीके से की जा सकेगी।
पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। डिजिटल सिस्टम में रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से नियुक्ति से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया की निगरानी आसान होगी। इससे फर्जी उपस्थिति, रिकॉर्ड में गड़बड़ी, भुगतान में देरी और वैधानिक अंशदान से जुड़ी शिकायतों पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल नोएडा प्राधिकरण स्तर पर कर्मचारियों का डेटा जुटाने की प्रक्रिया चल रही है। सभी वर्क सर्किल से जानकारी मिलने के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद करीब 5,700 आउटसोर्स कर्मचारियों को यूपीसीओएस की नई व्यवस्था से जोड़ने की अगली प्रक्रिया शुरू होगी।
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