कॉमनवेल्थ में जूडो गोल्ड जीतने वाली दरोगा अस्मिता डे सम्मानित, CM योगी ने की जमकर तारीफ

टेन न्यूज नेटवर्क

Ghaziabad News (16/08/2026): कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में जूडो की 48 किलोग्राम महिला स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाने वाली गाजियाबाद पुलिस की दरोगा अस्मिता डे को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लखनऊ में सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्मिता को सम्मानित करते हुए उनकी उपलब्धि की सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने अस्मिता की उपलब्धि को उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ-साथ पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जूडो में स्वर्ण पदक जीतकर अस्मिता ने उत्तर प्रदेश और यूपी पुलिस को नई पहचान दिलाई है।

मुख्यमंत्री से मिली सम्मान की सराहना

लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्मिता डे की खेल उपलब्धियों और संघर्षपूर्ण यात्रा की प्रशंसा की। अस्मिता ने त्रिपुरा से उत्तर प्रदेश तक का सफर तय करते हुए पुलिस सेवा में प्रवेश किया और इसी दौरान अपने खेल करियर को भी आगे बढ़ाया। पुलिस सेवा से जुड़े अवसरों और खेल प्रशिक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी सफलता में नियमित अभ्यास, प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

DGP राजीव कृष्ण ने पुलिस मुख्यालय में किया सम्मानित

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में डीजीपी राजीव कृष्ण ने भी अस्मिता डे का स्वागत कर उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम में डीजी पीएसी आलोक सिंह और आईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। डीजीपी ने अस्मिता की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने यूपी पुलिस का नाम देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गौरवान्वित किया है। इस दौरान उनके आगामी करियर और पदोन्नति को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों के अनुसार अस्मिता की पदोन्नति की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ाई जाएगी।

अस्मिता डे

पुलिस गोल्ड डिस्क देकर बढ़ाया सम्मान

अस्मिता डे को पुलिस विभाग की ओर से गोल्ड डिस्क प्रदान कर सम्मानित किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके परिवार, प्रशिक्षण और कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों से जुड़े पहलुओं पर भी जानकारी ली। अस्मिता ने प्रतियोगिता से पहले अपनी तैयारियों पर पूरा भरोसा बनाए रखा था। प्रशिक्षण के दौरान उनके प्रदर्शन को देखकर कोच और साथी खिलाड़ी भी उनसे बेहतर परिणाम की उम्मीद कर रहे थे। फाइनल मुकाबले में उन्होंने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

कनाडा की खिलाड़ी को हराकर हासिल किया स्वर्ण

कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में अस्मिता डे ने महिलाओं की 48 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने कनाडा की हेइडी क्वाच को पराजित कर स्वर्ण पदक हासिल किया। इस जीत के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जूडो प्रतियोगिता में भारत का गौरव बढ़ाया। उनकी उपलब्धि को भारतीय खेल जगत और उत्तर प्रदेश पुलिस, दोनों के लिए बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।

2023 में कांस्टेबल के रूप में शुरू किया पुलिस करियर

अस्मिता डे मूल रूप से त्रिपुरा के बेलोनिया की रहने वाली हैं। उन्होंने 28 जुलाई 2023 को गाजियाबाद पुलिस में कांस्टेबल के पद पर नियुक्त होकर पुलिस सेवा की शुरुआत की थी। उनकी तैनाती पुलिस लाइन में हुई थी। पुलिस सेवा के साथ ही उनकी खेल प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी जारी रही। राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला और 23 मार्च 2026 को वह दरोगा बनीं।

800 मीटर दौड़ से शुरू हुआ था खेल सफर

अस्मिता ने अपने खेल करियर की शुरुआत जूडो से नहीं, बल्कि 800 मीटर दौड़ से की थी। जिला स्तरीय ट्रायल के दौरान उनका रुझान जूडो की ओर बढ़ा और उन्होंने एथलेटिक्स छोड़कर इसी खेल को अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने भोपाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के क्षेत्रीय केंद्र में कोच यशपाल सोलंकी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया। लगातार बेहतर प्रदर्शन के चलते वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली खिलाड़ियों में शामिल हुईं। वह केंद्र सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के विकास समूह का भी हिस्सा हैं।

पिता के निधन के बाद भी नहीं मानी हार

अस्मिता के जीवन में एक कठिन दौर उनके पिता के निधन के बाद आया। पिता के निधन के बाद उनके सामने आर्थिक और भावनात्मक चुनौतियां बढ़ गई थीं। इसके बावजूद उन्होंने खेल से अपना नाता नहीं तोड़ा। पिता के निधन के करीब दो महीने बाद आयोजित एशियन गेम्स के ट्रायल में उन्होंने हिस्सा लिया और राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया। इस प्रदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को मजबूती दी और उन्होंने आगे भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए अपनी तैयारी जारी रखी।

स्वर्ण पदक जीतने के बाद अस्मिता ने अपनी सफलता को अपने दिवंगत पिता, कोच और उन सभी लोगों को समर्पित किया, जिन्होंने उनके संघर्ष के दौर में उनका साथ दिया।

संघर्ष से सफलता तक पहुंची अस्मिता की कहानी

अस्मिता डे की कहानी खेल और पुलिस सेवा के बीच शानदार तालमेल की मिसाल बनकर सामने आई है। त्रिपुरा से उत्तर प्रदेश पहुंचने, पुलिस विभाग में कांस्टेबल के रूप में करियर शुरू करने, दरोगा बनने और फिर कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने तक का उनका सफर संघर्ष और दृढ़ संकल्प से भरा रहा है। उनकी उपलब्धि ने न केवल भारतीय जूडो को नई ऊंचाई दी है, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस की खेल प्रतिभाओं को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई है। स्वतंत्रता दिवस पर मिला यह सम्मान उनकी उपलब्धि को और खास बनाता है तथा युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है।


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