दिल्ली की विरासत को मिलेगा नया जीवन, होटल से लेकर संग्रहालय तक बन सकेंगी ऐतिहासिक इमारतें
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (15 August 2026): दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों और हवेलियों को संरक्षित करने के साथ उन्हें नए उपयोग में लाने की दिशा में बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। ड्राफ्ट मास्टर प्लान दिल्ली-2047 में चांदनी चौक की पुरानी हवेलियों से लेकर लुटियंस दिल्ली और सिविल लाइंस की विरासत इमारतों को होटल, कार्यालय, संग्रहालय, पुस्तकालय और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना प्रस्तावित की गई है। हालांकि, इस दौरान इमारतों की वास्तुकला और ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
योजना के तहत विरासत संपत्तियों के मालिकों को संरक्षण के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। इसके लिए हेरिटेज प्रॉपर्टीज को 50 का इंसेंटिव फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) दिया जा सकता है। यह अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) प्रमाणपत्र के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, TDR तभी जारी किया जाएगा जब संबंधित इमारत में जरूरी मरम्मत और सुधार का काम पूरा हो तथा सक्षम एजेंसी से प्रमाणन प्राप्त हो। विरासत को नुकसान पहुंचाने या रखरखाव की शर्तों का पालन नहीं करने पर मालिकों पर कार्रवाई और जुर्माने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।
ड्राफ्ट में ‘एडैप्टिव रीयूज’ की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, जिसके तहत विरासत इमारतों के एक हिस्से या पूरी इमारत को व्यावसायिक, कार्यालय, होटल या सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। यहां प्रदर्शन स्थल, संग्रहालय, पुस्तकालय और शिल्प केंद्र जैसी गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं। इसके लिए संबंधित वैधानिक मंजूरी और हेरिटेज इंपैक्ट असेसमेंट जरूरी होगा। साथ ही अग्नि सुरक्षा और जीवन सुरक्षा के मानकों का पालन करना होगा। दिल्ली में चांदनी चौक यानी पुरानी दिल्ली, लुटियंस बंगला जोन और सिविल लाइंस बंगला क्षेत्र को प्रमुख विरासत क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है।
वॉल्ड सिटी के पुनरुद्धार के लिए भी बहु-एजेंसी योजना प्रस्तावित की गई है। स्थानीय निकाय और संबंधित एजेंसियां सांस्कृतिक क्षेत्रों की पहचान कर संरक्षण और क्षेत्र सुधार योजनाएं तैयार करेंगी। विरासत भवनों के मालिकों को संरक्षण, पुनर्स्थापन और नए उपयोग के लिए सहायता देने का भी प्रस्ताव है। साथ ही पुरानी दिल्ली से प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों और खतरनाक कारोबार को बाहर करने की योजना है। गोदाम और थोक कारोबार को भी शहर के अनुकूल दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की बात कही गई है, जबकि ज्वलनशील और खतरनाक वस्तुओं के भंडारण पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
मास्टर प्लान में चांदनी चौक को 24 घंटे सक्रिय सांस्कृतिक और वाणिज्यिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। यहां छोटे संग्रहालय, प्रदर्शन स्थल, पुस्तकालय, रीडिंग रूम, शिल्प केंद्र और गेस्ट हाउस विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। साथ ही प्रमुख ट्रांजिट स्टेशनों के आसपास सार्वजनिक प्लाजा बनाने, पैदल यात्रियों के लिए सुविधाजनक और बाधामुक्त रास्ते तैयार करने तथा बैठने और छायादार स्थानों की व्यवस्था करने की योजना है। सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और भारी जुर्माने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
नीति लागू होने के बाद स्थानीय निकायों और संबंधित एजेंसियों में हेरिटेज सेल स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है। ये सेल विरासत संपत्तियों की निगरानी, संरक्षण और प्रबंधन के साथ आधुनिक एवं औद्योगिक विरासत की पहचान तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों के विकास में भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा विरासत संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए हेरिटेज फंड बनाने की भी योजना है। यदि प्रस्तावित प्रावधान लागू होते हैं, तो पुरानी दिल्ली समेत राजधानी के ऐतिहासिक इलाकों में संरक्षण और आधुनिक उपयोग के बीच संतुलन बनाने की कोशिश को नई दिशा मिल सकती है।
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