दिल्ली में बिजली बिल बढ़ने की तैयारी, अगले बिल से लगेगा अतिरिक्त सरचार्ज

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (14 August 2026): दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग यानी डीईआरसी ने राजधानी की तीन प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों को अतिरिक्त फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज लगाने की मंजूरी दे दी है। यह सरचार्ज बिजली खरीद की बढ़ी लागत और गर्मियों में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची बिजली की मांग को देखते हुए लगाया गया है। इसका असर अगले बिलिंग चक्र से उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर पड़ सकता है। हालांकि, दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को इस अतिरिक्त बोझ से राहत मिलेगी।

दरअसल, इस साल भीषण गर्मी के दौरान दिल्ली में बिजली की मांग काफी बढ़ गई थी। मांग पूरी करने के लिए बिजली वितरण कंपनियों को बाहर से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ी। इसी अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए बीआरपीएल, बीवाईपीएल और टीपीडीडीएल ने डीईआरसी के सामने सरचार्ज बढ़ाने की मांग रखी थी। कंपनियों ने जून महीने के लिए क्रमशः 31.64 प्रतिशत, 24.02 प्रतिशत और 23.71 प्रतिशत एफपीपीएएस का दावा किया था। इसके बाद नियामक आयोग ने निर्धारित सीमा से अतिरिक्त सरचार्ज लगाने की अनुमति दी है।

नई मंजूरी के बाद तीनों कंपनियों के उपभोक्ताओं पर कुल सरचार्ज अलग-अलग होगा। बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड यानी बीआरपीएल के उपभोक्ताओं के लिए कुल एफपीपीएएस बढ़कर 17.94 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड यानी बीवाईपीएल के उपभोक्ताओं के लिए यह 17.43 प्रतिशत और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड यानी टीपीडीडीएल के उपभोक्ताओं के लिए 18.50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। यानी इन कंपनियों के उपभोक्ताओं के बिजली बिल में खपत और लागू शुल्क के हिसाब से अतिरिक्त राशि जुड़ सकती है।

डीईआरसी की मंजूरी के अनुसार यह अतिरिक्त सरचार्ज पहले से निर्धारित 10 प्रतिशत एफपीपीएएस सीमा के अतिरिक्त होगा। इसका मतलब है कि जिन उपभोक्ताओं पर बिजली सब्सिडी लागू नहीं है, उन्हें अगले बिल से बढ़े हुए सरचार्ज का असर महसूस हो सकता है। हालांकि, 200 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले और दिल्ली सरकार की सब्सिडी योजना का विकल्प चुन चुके पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को इस बढ़ोतरी से राहत जारी रहेगी। ऐसे उपभोक्ताओं का बिजली बिल निर्धारित सब्सिडी नियमों के तहत पहले की तरह शून्य रह सकता है।

बिजली कंपनियों का कहना है कि गर्मियों में बढ़ी मांग और महंगी बिजली खरीद के कारण अतिरिक्त लागत सामने आई है, जिसकी भरपाई के लिए एफपीपीएएस जरूरी है। वहीं उपभोक्ताओं के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि सब्सिडी के दायरे से बाहर आने वाले बिजली बिलों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। ऐसे में दिल्ली में बिजली की बढ़ती मांग, बिजली खरीद की लागत और उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी—इन तीनों के बीच संतुलन आने वाले समय में अहम मुद्दा रहेगा।


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