GBU में ISAE 2026 के दूसरे दिन भी पशु कल्याण पर गहन मंथन

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (13/08/2026): गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU), ग्रेटर नोएडा में आयोजित 59वें अंतरराष्ट्रीय अनुप्रयुक्त एथोलॉजी सम्मेलन (ISAE 2026) के दूसरे दिन भी पशु व्यवहार, पशु कल्याण और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों के बीच व्यापक चर्चा हुई। 10 से 14 अगस्त तक चल रहे इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद और पशु कल्याण विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे हैं।

सम्मेलन का उद्देश्य पशु व्यवहार और कल्याण के क्षेत्र में वैश्विक वैज्ञानिक संवाद को बढ़ावा देना तथा शोध के नए आयामों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विचार-विमर्श करना है। कार्यक्रम में पशु व्यवहार, कृषि एवं पशुपालन, प्रयोगशाला पशु कल्याण, वन्यजीव प्रबंधन, साथी पशुओं की देखभाल, मानव-पशु संबंध और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल जैसे महत्वपूर्ण विषय चर्चा के केंद्र में हैं। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार सम्मेलन में करीब 200 वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों के शामिल होने की योजना है।

विज्ञान के साथ मानवीय सरोकारों पर जोर

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजन किसी भी विश्वविद्यालय के लिए केवल शैक्षणिक गतिविधि नहीं होते, बल्कि वे वैश्विक ज्ञान, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों को एक-दूसरे से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि पशु कल्याण से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान का उद्देश्य केवल पशु व्यवहार के बारे में नई जानकारी जुटाना नहीं होना चाहिए। इसके साथ ऐसी व्यवस्थाओं और नीतियों के विकास पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है, जिनमें मनुष्य और पशुओं के हितों के बीच संतुलन कायम किया जा सके।

कुलपति के मुताबिक आधुनिक विज्ञान और तकनीक को पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़कर पशु कल्याण तथा मानव-पशु सह-अस्तित्व के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने ISAE 2026 को विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों के बीच शोध सहयोग, विचारों के आदान-प्रदान और भविष्य की अनुसंधान योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय का वातावरण ऐसे वैश्विक अकादमिक आयोजनों के लिए अनुकूल है, जहां वैज्ञानिक विषयों के साथ-साथ सामाजिक, नैतिक और मानवीय पहलुओं पर भी गंभीर चर्चा हो सकती है।

भारत में सम्मेलन का आयोजन महत्वपूर्ण उपलब्धि

ISAE 2026 के आयोजन सचिव डॉ. विजय पाल सिंह ने कहा कि भारत में इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन की थीम “Shared Worlds” भारत की उस सांस्कृतिक सोच से भी जुड़ती है, जिसमें समस्त जीव-जगत को एक व्यापक परिवार के रूप में देखने की भावना निहित है।

डॉ. सिंह ने कहा कि अनुप्रयुक्त एथोलॉजी केवल पशुओं के व्यवहार को समझने का विज्ञान नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य व्यवहार संबंधी वैज्ञानिक जानकारी का इस्तेमाल पशुओं के लिए अधिक नैतिक, वैज्ञानिक और संवेदनशील व्यवस्थाएं तैयार करने में करना भी है। उन्होंने कहा कि कृषि और पशुपालन, जैव-चिकित्सा अनुसंधान, वन्यजीव संरक्षण तथा साथी पशुओं की देखभाल जैसे क्षेत्रों में पशु कल्याण के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को और मजबूत करने की आवश्यकता है। ISAE 2026 इस दिशा में भारत सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों के विशेषज्ञों को संवाद का साझा मंच उपलब्ध करा रहा है।

पशु व्यवहार से स्वास्थ्य और उत्पादकता तक चर्चा

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि पशु व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन अब केवल अकादमिक शोध तक सीमित नहीं रह गया है। इसका सीधा प्रभाव पशुओं के स्वास्थ्य, उत्पादकता, शारीरिक एवं मानसिक कल्याण और मनुष्य-पशु संबंधों पर पड़ता है। कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में पशुओं के व्यवहार को बेहतर ढंग से समझकर उनके लिए उपयुक्त आवास, पोषण और प्रबंधन प्रणालियां विकसित की जा सकती हैं। इसी प्रकार साथी पशुओं के व्यवहार में होने वाले बदलावों को पहचानना उनके स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वन्यजीव प्रबंधन में व्यवहार संबंधी वैज्ञानिक अध्ययन संरक्षण की रणनीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि अलग-अलग प्रजातियों के प्राकृतिक व्यवहार और उनकी आवश्यकताओं को समझे बिना प्रभावी संरक्षण एवं कल्याण की रणनीति तैयार करना कठिन है।

प्रयोगशाला अनुसंधान में जिम्मेदार वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर जोर

सम्मेलन के दौरान प्रयोगशाला अनुसंधान में पशु कल्याण से जुड़े विषयों पर भी विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने ऐसे वैज्ञानिक मॉडल और तकनीक विकसित करने की आवश्यकता बताई, जिनसे जहां पशु प्रयोग आवश्यक हों, वहां उन्हें अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और जिम्मेदार तरीके से किया जा सके। साथ ही अनावश्यक पशु प्रयोगों को कम करने के लिए वैकल्पिक एवं उन्नत अनुसंधान मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक प्रगति के साथ पशु कल्याण और नैतिक जिम्मेदारियों को समान महत्व दिया जाना जरूरी है।

भविष्य के शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर नजर

GBU में चल रहा ISAE 2026 सम्मेलन पशु व्यवहार और पशु कल्याण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संवाद का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। सम्मेलन के दूसरे दिन हुई चर्चाओं में वर्तमान शोध उपलब्धियों के साथ भविष्य की वैज्ञानिक प्राथमिकताओं, नई तकनीकों और विभिन्न देशों के बीच संभावित शोध सहयोग पर भी विचार किया गया।

सम्मेलन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि पशु व्यवहार की वैज्ञानिक समझ को तकनीकी नवाचार और मानवीय दृष्टिकोण के साथ जोड़कर पशु कल्याण के क्षेत्र में अधिक प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकते हैं। ISAE 2026 के माध्यम से दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान भविष्य में नए शोध एवं सहयोग की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है।


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