दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल 2026 को कैबिनेट की मंजूरी, स्थानीय छात्रों के लिए 25% सीटें आरक्षित

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (09 August 2026): दिल्ली के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल 2026 के मसौदे को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राजधानी में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और उनके संचालन के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार करना है। बिल के विधानसभा से पारित होकर कानून बनने के बाद निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर सरकार की निगरानी भी मजबूत होने की उम्मीद है।

प्रस्तावित बिल का सबसे अहम प्रावधान दिल्ली के स्थानीय विद्यार्थियों से जुड़ा है। कानून लागू होने के बाद राजधानी की प्रत्येक निजी यूनिवर्सिटी को अपने हर शैक्षणिक पाठ्यक्रम में 25 प्रतिशत सीटें दिल्ली के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रखनी होंगी। इन सीटों पर प्रवेश दिल्ली सरकार की मौजूदा आरक्षण नीति के मानकों के अनुसार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य दिल्ली के युवाओं को अपने ही शहर में उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

बिल में स्थानीय छात्रों के लिए फीस में राहत और छात्रवृत्ति का भी प्रावधान किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार 25 प्रतिशत स्थानीय छात्रों को अलग-अलग स्तर पर शुल्क में छूट दी जाएगी। इनमें 5 प्रतिशत छात्रों की पूरी फीस माफ, 10 प्रतिशत छात्रों को 50 प्रतिशत फीस में छूट और 10 प्रतिशत छात्रों को 25 प्रतिशत फीस में छूट देने का प्रावधान बताया गया है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी विद्यार्थियों को निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का अवसर मिलने की उम्मीद है।

प्रस्तावित कानून में निजी विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर भी कई प्रावधान किए गए हैं। विश्वविद्यालयों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के निर्धारित मानकों का पालन जरूरी होगा। शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति भी निर्धारित मानकों के अनुसार करनी होगी। इसके अलावा निजी विश्वविद्यालयों को एकात्मक मॉडल के तहत केवल अपने मुख्य परिसर से संचालित होने की अनुमति होगी और वे किसी बाहरी कॉलेज को संबद्धता नहीं दे सकेंगे।

विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि और बुनियादी ढांचे से जुड़ी शर्तें भी प्रस्तावित की गई हैं। किसी संस्था के पास दिल्ली में विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए कम से कम 30 वर्षों का भूमि स्वामित्व या लीज अधिकार होना जरूरी होगा। इसके साथ ही आधुनिक कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, डिजिटल संसाधनों और विद्यार्थियों के लिए आवश्यक अन्य सुविधाओं का विकास करना अनिवार्य होगा। इन प्रावधानों का उद्देश्य निजी विश्वविद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना है।

सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों की निगरानी के लिए भी व्यवस्था प्रस्तावित की है। दिल्ली के उच्च शिक्षा मंत्री को प्रत्येक निजी विश्वविद्यालय का ‘विजिटर’ बनाया जाएगा, जिन्हें संस्थान से प्रशासनिक जानकारी मांगने और परिसर का निरीक्षण करने का अधिकार होगा। नियमों के उल्लंघन या किसी तरह की अनियमितता सामने आने पर प्रशासनिक, शैक्षणिक और वित्तीय मामलों की जांच कराई जा सकेगी। हालांकि, ये प्रावधान अंतिम रूप से तभी लागू होंगे जब बिल विधानसभा की विधायी प्रक्रिया से पारित होकर कानून का रूप लेगा।


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