RJD में बढ़ता असंतोष बना तेजस्वी यादव के लिए चुनौती! परिवार से पार्टी नेताओं तक उठ रहे सवाल

रंजन अभिषेक, टेन न्यूज नेटवर्क

Bihar News (08 अगस्त 2026): राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर इन दिनों संगठन और नेतृत्व को लेकर अंतर्विरोध की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के भीतर से सामने आ रहे नेताओं के बयान और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि असंतोष की आवाजें सिर्फ पार्टी के बाहर से नहीं, बल्कि लालू प्रसाद यादव के परिवार और आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से भी सामने आती रही हैं।

आरजेडी के भीतर मौजूदा स्थिति को केवल हालिया घटनाओं से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। पिछले कुछ समय में पार्टी के कई नेताओं ने संगठन, नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया को लेकर अपनी नाराजगी सार्वजनिक की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या तेजस्वी यादव के सामने पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है?

परिवार से ही उठी विरोध की आवाज

आरजेडी में तेजस्वी यादव के नेतृत्व को लेकर मतभेदों की चर्चा सबसे पहले लालू परिवार के भीतर ही देखने को मिली। तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के बीच राजनीतिक मतभेद कई मौकों पर सार्वजनिक हुए। तेज प्रताप ने तेजस्वी के आसपास मौजूद लोगों और उनकी राजनीतिक कार्यशैली को लेकर भी नाराजगी जाहिर की थी।

बाद में तेज प्रताप यादव ने आरजेडी से अलग होकर जनशक्ति जनता दल नाम से अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई। इसके बाद उन्होंने आरजेडी के खिलाफ चुनावी मैदान में भी अपना उम्मीदवार उतारा। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान उनकी पार्टी की उम्मीदवार वीणा मानवी का नामांकन रद्द होने के बाद तेज प्रताप ने आरजेडी के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर का समर्थन किया।

यह घटनाक्रम लालू परिवार के भीतर मौजूद राजनीतिक मतभेदों को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बना।

मीसा भारती के बयान से भी उठे थे सवाल

तेजस्वी यादव के नेतृत्व और परिवार के भीतर मतभेदों की चर्चा के बीच लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती का बयान भी काफी चर्चित रहा था। उन्होंने कहा था कि परिवार में भाई-भाई के बीच मतभेद होते रहते हैं और आरजेडी तो एक बड़ा परिवार है।

राजनीतिक विश्लेषकों ने उस समय इस बयान को परिवार और पार्टी के भीतर चल रही अलग-अलग राय के संदर्भ में देखा था।

रोहिणी आचार्य ने भी उठाए थे सवाल

लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य भी तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले कुछ नेताओं और सलाहकारों को लेकर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं।

रोहिणी आचार्य ने संजय यादव और रमीज को लेकर आरोप लगाए थे कि कुछ लोग पार्टी में प्रभावशाली होकर संगठन को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग रही हैं।

वहीं, जब तेजस्वी यादव की ओर से आरजेडी की संगठनात्मक इकाइयों को भंग करने का फैसला सामने आया, तब रोहिणी आचार्य ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कदम काफी पहले उठाया जाना चाहिए था।

पार्टी नेताओं के बीच भी सामने आया अंतर्विरोध

आरजेडी के भीतर असंतोष की चर्चा केवल लालू परिवार तक सीमित नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच भी हाल के दिनों में बयानबाजी सामने आई है।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान जहानाबाद सांसद सुरेंद्र यादव ने आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता को लेकर सवाल किए थे। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने उम्मीदवार को लेकर कहा था कि वह उन्हें नहीं जानते।

इस बयान ने पार्टी के भीतर उम्मीदवार चयन और संगठन के स्तर पर संवाद को लेकर सवाल खड़े किए।

भाई वीरेंद्र और शक्ति यादव के बीच बयानबाजी

आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव के बीच भी हालिया बयानबाजी चर्चा में रही। शक्ति यादव के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाई वीरेंद्र ने बिना नाम लिए कहा था कि कुछ लोग अपनी सीमा में रहें।

भाई वीरेंद्र ने यह भी कहा था कि अगर उन्होंने बोलना शुरू किया तो कई ऐसे तथ्य सामने आएंगे, जिनका जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।

यह विवाद उस समय सामने आया जब शक्ति यादव ने भाई वीरेंद्र से पार्टी के लिए उनके योगदान को लेकर सवाल किया था।

अर्जुन राय के इस्तीफे ने भी बढ़ाई चिंता

आरजेडी के लिए एक और झटका तब माना गया जब लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद अर्जुन राय ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया।

अर्जुन राय ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है। उनके इस बयान ने आरजेडी के संगठन और नेतृत्व को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया।

इसी तरह पार्टी से इस्तीफा देने वाले मृत्युंजय तिवारी ने भी संगठन के भीतर खुद को अपमानित महसूस करने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी में सम्मान कम हुआ है और कुछ लोग संगठन को अंदर से कमजोर कर रहे हैं।

क्या नेतृत्व और संगठन के बीच बढ़ रही दूरी?

आरजेडी के भीतर सामने आ रहे इन घटनाक्रमों के बीच सबसे बड़ा सवाल नेतृत्व और संगठन के बीच संवाद को लेकर है। पार्टी के आलोचकों का आरोप है कि तेजस्वी यादव अपने राजनीतिक और संगठनात्मक दायित्वों के बीच अपेक्षित तालमेल नहीं बना पा रहे हैं।

तेजस्वी यादव के विदेश दौरों और उनकी राजनीतिक सक्रियता को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं की बयानबाजी बढ़ जाती है और अनुशासन को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी राजनीतिक दल के भीतर नेताओं के बीच मतभेद होना अपने आप में असामान्य नहीं है। अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए इन घटनाक्रमों और पार्टी के भविष्य के राजनीतिक फैसलों को भी देखना होगा।

सलाहकारों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

तेजस्वी यादव के आसपास मौजूद सलाहकारों और उनकी राजनीतिक टीम को लेकर भी पार्टी के कुछ नेताओं और परिवार के सदस्यों की ओर से सवाल उठाए गए हैं।

आरजेडी के भीतर यह चर्चा भी है कि क्या पार्टी के पुराने नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं की राय नेतृत्व तक पर्याप्त रूप से पहुंच रही है? क्या निर्णय प्रक्रिया में कुछ चुनिंदा लोगों का प्रभाव बढ़ गया है?

यही सवाल पार्टी के भीतर असंतोष की एक बड़ी वजह के तौर पर सामने रखे जा रहे हैं।

अफवाहों के बीच नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती

राजनीतिक दल के भीतर जब असंतोष बढ़ता है तो उसके साथ अफवाहों का दौर भी शुरू हो जाता है। तेजस्वी यादव को लेकर भी समय-समय पर कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं सामने आती रही हैं। हालांकि उनके यूरोप में बसने या किसी राजनीतिक डील जैसी चर्चाओं की कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं है।

ऐसे में इन दावों को तथ्य के तौर पर नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

अब तेजस्वी यादव के सामने क्या चुनौती?

आरजेडी के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखने की है। तेजस्वी यादव को एक तरफ विपक्षी दलों से राजनीतिक मुकाबला करना है, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर पुराने नेताओं, कार्यकर्ताओं और असंतुष्ट नेताओं को साथ लेकर चलना भी जरूरी है।

पार्टी के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संगठन में नए सिरे से जिम्मेदारियां तय करते समय जमीनी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन बनाया जाए।

क्योंकि किसी भी राजनीतिक दल की ताकत केवल उसका शीर्ष नेतृत्व नहीं होता। संगठन के निचले स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता ही चुनावी राजनीति में पार्टी की असली ताकत होते हैं।

क्या RJD में बड़े पुनर्गठन की तैयारी है?

आरजेडी की संगठनात्मक इकाइयों को भंग किए जाने के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पार्टी बड़े संगठनात्मक पुनर्गठन की तैयारी में है।

अगर नए संगठन में पुराने और असंतुष्ट नेताओं को जगह मिलती है और पार्टी के भीतर संवाद की प्रक्रिया मजबूत होती है, तो मौजूदा विवाद को नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन अगर अंतर्विरोध आगे भी सार्वजनिक होते रहे, तो यह तेजस्वी यादव के नेतृत्व के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है।

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि आरजेडी किसी बड़े विभाजन की ओर बढ़ रही है। लेकिन इतना जरूर है कि परिवार से लेकर पार्टी संगठन तक सामने आ रहे मतभेदों ने तेजस्वी यादव के सामने एक गंभीर राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि तेजस्वी यादव इस असंतोष को कैसे संभालते हैं—क्या वे पार्टी में संवाद बढ़ाकर नाराज नेताओं को साथ लाते हैं, संगठन में बड़ा बदलाव करते हैं या फिर अपनी राजनीतिक टीम और रणनीति में व्यापक परिवर्तन करते हैं।

आरजेडी के भीतर उठती विरोध की आवाजें फिलहाल थमी नहीं हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर होने वाला संगठनात्मक बदलाव और नेताओं के अगले राजनीतिक कदम बिहार की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।।


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