ILJIN अग्निकांड: संयुक्त जांच के बाद फैक्ट्री में उत्पादन पर तत्काल रोक
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (04/08/2026): ग्रेटर नोएडा के इकोटेक एक्सटेंशन-3 स्थित ILJIN Electronics India Private Limited में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए फैक्ट्री की उत्पादन गतिविधियों और मशीनों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। संयुक्त जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि वर्तमान स्थिति में फैक्ट्री का संचालन मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है।
सहायक निदेशक कारखाना एवं श्रम प्रवर्तन अधिकारियों की संयुक्त टीम ने मंगलवार को घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। जांच के दौरान फैक्ट्री परिसर की तकनीकी स्थिति का आकलन करने के साथ-साथ प्रबंधन के प्रतिनिधियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई। फैक्ट्री हेड का लिखित बयान दर्ज किया गया तथा उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों और आग के बाद भवन एवं मशीनरी की स्थिति का परीक्षण भी किया गया।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि 4 अगस्त की सुबह लगभग 3:10 बजे फैक्ट्री के प्रथम तल स्थित Aging Testing Area में आग लगी थी। आग लगते ही फैक्ट्री प्रबंधन ने कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल अग्निशमन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया।
आग से भवन की संरचना को हुआ गंभीर नुकसान
जांच रिपोर्ट के अनुसार आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि प्रथम तल पर स्थापित PUF रूफिंग सिस्टम, स्टील ट्रस, स्टील बीम, कॉलम और अन्य संरचनात्मक हिस्से अत्यधिक तापमान से गंभीर रूप से प्रभावित हुए। विशेषज्ञों ने बताया कि आग के दौरान स्टील संरचना में अत्यधिक तापीय प्रसार (Thermal Expansion) हुआ, जबकि आग बुझाने के लिए बड़ी मात्रा में पानी डालने से अचानक तापीय संकुचन (Rapid Thermal Contraction) की स्थिति बनी। इसके परिणामस्वरूप स्टील संरचना में स्थायी तनाव (Residual Stress), बकलिंग, भार वहन क्षमता में कमी और संरचनात्मक मजबूती प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि आग बुझाने के दौरान भवन की बाहरी ईंट निर्मित दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। दुर्भाग्यवश उसी स्थान पर अग्निशमन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए थे, जिससे बड़ा हादसा हो गया।
दो अग्निशमन कर्मियों की मौत, कई घायल
इस दर्दनाक हादसे में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग के दो अधिकारियों/कर्मचारियों की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि तीन अन्य अग्निशमन कर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका उपचार जारी है। इसके अलावा फैक्ट्री कर्मचारी त्रिभुवन तिवारी भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उनका इलाज ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में चल रहा है।

भवन में मिली कई गंभीर सुरक्षा खामियां
संयुक्त जांच में भवन के भीतर कई तकनीकी और सुरक्षा संबंधी कमियां भी उजागर हुईं। अधिकारियों के अनुसार भवन में प्राकृतिक धुआं निकासी (Smoke Ventilation) की प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा प्रथम तल से लगातार पानी का रिसाव होकर भूतल और बेसमेंट तक पहुंच रहा था, जिससे विद्युत पैनल, केबल, पीएलसी, सर्वो ड्राइव तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण प्रणालियों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आग का असर केवल मशीनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्टील स्ट्रक्चर, आरसीसी संरचना, नींव तथा पूरे भवन की स्थिरता भी प्रभावित हुई है। ऐसी स्थिति में यदि भारी मशीनों का संचालन किया जाता है तो कंपन के कारण भवन के आंशिक या पूर्ण रूप से ध्वस्त होने, पुनः आग लगने, विद्युत दुर्घटना अथवा अन्य औद्योगिक हादसे की संभावना बनी रह सकती है।
कारखाना अधिनियम के तहत लगाया गया प्रतिबंध
इन सभी तथ्यों, संरचनात्मक क्षति, दो अग्निशमन कर्मियों की मृत्यु, अन्य कर्मचारियों के गंभीर रूप से घायल होने और मानव जीवन पर मंडरा रहे गंभीर खतरे को देखते हुए कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए प्रशासन ने क्षतिग्रस्त भवन, उसमें स्थापित सभी मशीनों, विद्युत प्रणाली और उत्पादन गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पूरी तरह जनसुरक्षा, कर्मचारियों के जीवन की रक्षा तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की पुनः दुर्घटना को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।
सुरक्षा प्रमाण-पत्र मिलने तक उत्पादन नहीं होगा शुरू
फैक्ट्री प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि किसी मान्यता प्राप्त और प्रतिष्ठित संस्था से भवन का स्ट्रक्चरल ऑडिट, मशीन रिस्क असेसमेंट, फायर रिस्क असेसमेंट, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी असेसमेंट, एनडीटी परीक्षण, फाउंडेशन एनालिसिस, फ्लोर लोड टेस्ट, सीस्मिक एनालिसिस सहित सभी आवश्यक सुरक्षा परीक्षण कराए जाएं। इन परीक्षणों की विस्तृत रिपोर्ट तथा विशेषज्ञों की सभी अनुशंसाओं के अनुपालन के बाद सुरक्षा प्रमाण-पत्र सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति प्राप्त किए बिना फैक्ट्री में किसी भी प्रकार की उत्पादन गतिविधि दोबारा शुरू नहीं की जा सकेगी। यदि फैक्ट्री प्रबंधन इस आदेश या इसके किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करता है तो कारखाना अधिनियम, 1948 की संबंधित धाराओं के अंतर्गत फैक्ट्री के दखलकार और प्रबंधक के विरुद्ध विधिक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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