Ghaziabad News (04/08/2026): यति नरसिंहानंद ने परिवार, जनसंख्या और सनातन समाज के भविष्य को लेकर एक विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल एक संतान तक सीमित रहना समाज के लिए नुकसानदायक प्रवृत्ति है। उन्होंने अधिक बच्चों के जन्म को सनातन समाज के संरक्षण और भविष्य की आवश्यकता बताते हुए लोगों से छोटे परिवार की सोच पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान यति नरसिंहानंद ने कहा कि, “वर्तमान समय में अधिकांश परिवार एक या दो बच्चों के बाद परिवार बढ़ाना बंद कर देते हैं। उनके अनुसार यह प्रवृत्ति आने वाली पीढ़ियों के सामाजिक और पारिवारिक ढांचे को कमजोर कर सकती है”। उन्होंने यहां तक कहा कि केवल एक बच्चे को जन्म देने वाली मां का उदाहरण उन्होंने “नागिन” से जोड़ते हुए अपनी बात रखी, जिसे लेकर उनका बयान चर्चा का विषय बन गया।
उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के भाई-बहन नहीं होते, वे जीवन की चुनौतियों में अकेले पड़ जाते हैं और परिवार की सामूहिक शक्ति भी कमजोर होती है। इस स्थिति के लिए उन्होंने माता-पिता दोनों को जिम्मेदार ठहराते हुए अधिक संतान पैदा करने की अपील की।
अपने संबोधन में यति नरसिंहानंद ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि द्रौपदी के अपमान के बाद हुए युद्ध ने यह संदेश दिया कि जो समाज अपनी महिलाओं के सम्मान की रक्षा नहीं कर पाता, उसका पतन निश्चित है। उन्होंने कहा कि उस युद्ध में केवल कौरव ही नहीं, बल्कि पांडवों को भी भारी क्षति उठानी पड़ी और अंततः वंश को बचाने के लिए केवल एक उत्तराधिकारी शेष रह गया।
उनका कहना था कि, “इतिहास और धर्मग्रंथ यह सिखाते हैं कि महिलाओं की गरिमा की रक्षा किसी भी समाज के अस्तित्व की मूल शर्त है। जो समाज इस जिम्मेदारी को निभाने में असफल रहता है, वह लंबे समय तक टिक नहीं सकता। यति नरसिंहानंद ने अपने संबोधन में हिंदू समाज की घटती जनसंख्या को चिंता का विषय बताते हुए कहा कि यदि समाज को अपने अस्तित्व, संस्कृति और परिवार व्यवस्था को सुरक्षित रखना है तो अधिक बच्चों को जन्म देने के लिए सकारात्मक सोच विकसित करनी होगी”।उन्होंने समाज के संपन्न वर्ग से इस दिशा में जागरूकता अभियान चलाने और लोगों को प्रेरित करने का भी आह्वान किया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि, सामाजिक चुनौतियों और तथाकथित “लव जिहाद” जैसी समस्याओं का समाधान धार्मिक शिक्षा, विशेष रूप से श्रीमद्भगवद्गीता के सिद्धांतों के अनुरूप जीवन जीने में निहित है। यह बयान उस समय दिया गया जब यति नरसिंहानंद एक धार्मिक महायज्ञ में भाग ले रहे थे। कार्यक्रम में उनके साथ यति अभयानंद, यति धर्मानंद, डॉ. योगेंद्र योगी, मोहित बजरंगी सहित कई संत और श्रद्धालु मौजूद रहे। अनुष्ठान का वैदिक संचालन पंडित सनोज शास्त्री द्वारा किया गया।
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