अब जंतर मंतर नहीं रहेगा धरना स्थल! सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया ?

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (03 August 2026): राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले धरना-प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब तलब किया है। याचिका में कहा गया है कि संसद और संवेदनशील सरकारी संस्थानों के नजदीक स्थित जंतर-मंतर अब बड़े आंदोलनों के लिए उपयुक्त नहीं रह गया है। अदालत ने मामले को महत्वपूर्ण बताते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है और विस्तृत सुनवाई के लिए अलग से सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखने को कहा। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि हाल के महीनों में जंतर-मंतर से निकले प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई है। विशेष रूप से 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संसद चलो मार्च और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की प्रस्तावित रैली का उल्लेख करते हुए कहा गया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए अदालत हस्तक्षेप करे।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रशासन को ऐसे मामलों से निपटने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए और यदि वह ऐसा करने में असमर्थ रहता है, तभी अदालत के समक्ष आए। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे, जैसे यातायात व्यवस्था, आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही और सुरक्षा संबंधी चिंताएं, गंभीर हैं और इन पर सरकार का पक्ष जानना आवश्यक है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि जंतर-मंतर तक आने-जाने के रास्ते सीमित हैं, जिससे बड़ी भीड़ के दौरान ट्रैफिक जाम, सुरक्षा जोखिम और मेडिकल जैसी आवश्यक सेवाओं के संचालन में बाधा उत्पन्न होती है। इसलिए विरोध-प्रदर्शनों के लिए किसी वैकल्पिक स्थान को स्थायी धरना स्थल घोषित करने की मांग की गई है। हाल ही में पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने भी सुझाव दिया था कि जंतर-मंतर के बजाय रामलीला मैदान को बड़े आंदोलनों के लिए निर्धारित किया जाए ताकि संसद, कनॉट प्लेस और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा प्रभावित न हो।

गौरतलब है कि जंतर-मंतर लंबे समय से देश के प्रमुख आंदोलनों का केंद्र रहा है। अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन, निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन, महिला पहलवानों का आंदोलन और हाल में नीट पेपर लीक के विरोध में चला सीजेपी का आंदोलन यहीं से संचालित हुआ था। अब सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि भविष्य में राजधानी में बड़े धरना-प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर ही मुख्य स्थल रहेगा या सरकार किसी नए वैकल्पिक स्थान का चयन करेगी।


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