चुनाव से पहले बसपा में भूचाल: मायावती ने भतीजे के ससुर अशोक सिद्धार्थ की पार्टी से छुट्टी

टेन न्यूज नेटवर्क

Uttar Pradesh News (02/08/2026): उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिला है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से स्थायी रूप से निष्कासित कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भविष्य में किसी भी परिस्थिति में उनकी दोबारा पार्टी में वापसी नहीं होगी।

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में मायावती ने इस कार्रवाई के पीछे अनुशासनहीनता, संगठनात्मक निर्देशों की अनदेखी और पार्टी की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने की कोशिश को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी हित सर्वोपरि है और संगठन में अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

दोबारा मौका मिला, लेकिन नहीं बदला रवैया

मायावती ने बताया कि इससे पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भी अशोक सिद्धार्थ पर प्रदेश नेतृत्व के साथ तालमेल न बैठाने और अनुशासनहीनता के आरोप लगे थे। उस समय उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था, लेकिन भविष्य में गलती न दोहराने के आश्वासन पर दोबारा जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्वापसी के समय उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति से दूर रखते हुए अन्य राज्यों में संगठन विस्तार का कार्य सौंपा गया था।

अन्य राज्यों से भी मिली लगातार शिकायतें

बसपा प्रमुख के अनुसार, अशोक सिद्धार्थ को कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि इन राज्यों से भी उनके कामकाज और व्यवहार को लेकर लगातार शिकायतें मिलती रहीं। कई बार चेतावनी देने और सुधार का अवसर देने के बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। इसी के चलते पहले उन्हें सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया और अब पार्टी से स्थायी रूप से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया।

चुनावी माहौल बिगाड़ने की कोशिश का आरोप

मायावती ने आरोप लगाया कि जिम्मेदारियां वापस लिए जाने के बाद अशोक सिद्धार्थ ने उत्तर प्रदेश में अपनी सक्रिय वापसी की खबरें फैलाकर संगठन में भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया। उनके मुताबिक, इस तरह की गतिविधियां आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को प्रभावित कर सकती थीं और कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जा रहा था। इसी वजह से पार्टी नेतृत्व ने उनके खिलाफ अंतिम और कठोर कार्रवाई की।

आकाश आनंद की भूमिका पर भी मायावती ने जारी किए स्पष्ट निर्देश

इस घटनाक्रम से पहले 31 जुलाई को मायावती ने सोशल मीडिया के माध्यम से आकाश आनंद की भूमिका को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। उन्होंने स्पष्ट किया था कि विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों के चयन और घोषणा का अंतिम अधिकार केवल पार्टी अध्यक्ष के पास है।

उन्होंने कहा कि आकाश आनंद और अन्य समन्वयक केवल उनके निर्देशों के आधार पर कार्यकर्ता सम्मेलनों में उम्मीदवारों के नाम घोषित करेंगे। इसी क्रम में 10 अगस्त को हाथरस के सादाबाद में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में आकाश आनंद की मौजूदगी प्रस्तावित है, जहां वे पार्टी नेतृत्व के निर्देशानुसार उम्मीदवार के नाम की घोषणा करेंगे।

समीक्षा बैठकों और दौरों पर भी नियंत्रण

मायावती ने संगठनात्मक अनुशासन को और मजबूत करते हुए यह भी निर्देश दिया है कि आकाश आनंद देशभर में समीक्षा बैठकें कर सकते हैं, लेकिन प्रत्येक बैठक और कार्यक्रम की जानकारी पहले पार्टी अध्यक्ष को दी जाएगी। संबंधित राज्य प्रभारी इन बैठकों की रिपोर्ट लखनऊ और दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय को अनिवार्य रूप से भेजेंगे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में किसी भी दौरे या कार्यक्रम से पहले आकाश आनंद और संबंधित समन्वयकों को मायावती से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होगा।

डॉ. अशोक सिद्धार्थ का जन्म 5 जनवरी 1965 को हुआ था। पेशे से नेत्र रोग विशेषज्ञ रहे अशोक सिद्धार्थ ने महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज से नेत्र चिकित्सा में डिप्लोमा प्राप्त किया। सरकारी सेवा के दौरान वे बामसेफ से जुड़े और संगठन में विधानसभा, जिला तथा मंडल स्तर पर विभिन्न पदों पर कार्य किया।

वर्ष 2007 में कन्नौज के गुरसहायगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक के रूप में कार्यरत रहते हुए उन्होंने सरकारी नौकरी से इस्तीफा दिया और सक्रिय राजनीति में कदम रखते हुए बसपा का दामन थाम लिया।

राजनीतिक जीवन में वे 2009 और 2016 में विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य बने। बाद में वर्ष 2016 में बसपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा, जहां वे 2022 तक सांसद रहे। पार्टी संगठन में उन्होंने कानपुर-आगरा जोनल कोऑर्डिनेटर, राष्ट्रीय सचिव और दक्षिण भारत के कई राज्यों सहित विभिन्न प्रदेशों के प्रभारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभाईं।

उनकी पत्नी सुनीता सिद्धार्थ वर्ष 2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। संगठन में अशोक सिद्धार्थ को लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर रणनीतिक जिम्मेदारियां संभालने वाले नेताओं में गिना जाता रहा, लेकिन अब अनुशासन और संगठनात्मक मतभेदों के चलते उनका बसपा से राजनीतिक सफर समाप्त हो गया।


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