New Delhi News (02 अगस्त 2026): सनातन सेवा न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर शिवोम मिश्रा ने CJP प्रवक्ता सौरभ दास के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने रुचिका के बचाव में कहा था कि “अपशब्दों का इस्तेमाल देश में कब से अपराध हो गया?” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवोम मिश्रा ने कहा कि यदि सरकार इस तर्क को स्वीकार करती है कि गाली देना अपराध नहीं है, तो समान न्याय के सिद्धांत के तहत यही नियम देश के सभी नागरिकों और सभी मामलों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून किसी एक व्यक्ति या वर्ग के लिए अलग और दूसरे के लिए अलग नहीं हो सकता।
शिवोम मिश्रा ने NCRB के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2022 में SC/ST एक्ट के तहत 67,646 तथा वर्ष 2023 में 70,749 मामले दर्ज किए गए। उनका दावा है कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है, जिनमें जातिसूचक गाली-गलौज को आधार बनाकर एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने मांग की कि यदि गाली देना अपराध नहीं माना जाता है, तो केवल गाली-गलौज के आधार पर दर्ज ऐसे मामलों की समीक्षा कर उन्हें निरस्त (क्वैश) किया जाए, ताकि समान न्याय के सिद्धांत का पालन सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, धारा 352 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 में अपमानजनक या अश्लील भाषा के प्रयोग पर दंड का प्रावधान है। ऐसे में केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या इन कानूनी प्रावधानों में किसी प्रकार का संशोधन प्रस्तावित है। उनके अनुसार, यदि गाली देना अपराध है तो कानून का पालन सभी मामलों में समान रूप से होना चाहिए और यदि अपराध नहीं है तो संबंधित कानूनों में आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए।
शिवोम मिश्रा ने SC/ST एक्ट के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत पीड़ितों को सरकारी खजाने से 85 हजार रुपये से लेकर 8.25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। उनका कहना है कि जिन मामलों में एफआईआर का मुख्य आधार केवल गाली-गलौज था, उनकी समीक्षा की जानी चाहिए और यदि ऐसे मामलों में अपराध नहीं माना जाता है तो दी गई सरकारी सहायता राशि की भी कानूनी समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने लोकसभा सचिवालय को पत्र भी भेजा है।
अपने बयान के अंत में शिवोम मिश्रा ने लोगों से इस मुद्दे पर व्यापक जनसमर्थन देने की अपील की। उन्होंने कहा कि “एक देश, एक विधान, एक संविधान” की भावना के अनुरूप सभी नागरिकों के लिए कानून का समान अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से सवर्ण और OBC वर्ग के कई लोग SC/ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों में कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से पूरे विषय की निष्पक्ष समीक्षा कर सभी नागरिकों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करने की मांग की।
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