इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण: खाद्य सुरक्षा से समझौता नहीं

टेन न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली  (31 जुलाई 2026): केंद्र सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि यह योजना खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने वाला एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल उत्पादन के लिए कभी भी गरीबों के हिस्से का अनाज इस्तेमाल नहीं किया जाता और केवल खाद्य सुरक्षा संबंधी सभी दायित्व पूरे होने के बाद उपलब्ध अधिशेष या अनुपयोगी अनाज का ही उपयोग किया जाता है।

सरकार ने उस दावे को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) का चावल डिस्टिलरी को कम कीमत पर बेचकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया। सरकार के अनुसार, एफसीआई का चावल इथेनॉल उत्पादन के लिए स्वीकृत कई फीडस्टॉक में से केवल एक है और इसकी कीमत भी सरकार द्वारा तय किए गए मूल्य निर्धारण ढांचे के अनुसार निर्धारित होती है।

खाद्य सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

सरकार ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और अनिवार्य बफर स्टॉक की जरूरतें पूरी होने के बाद ही अधिशेष अनाज को इथेनॉल उत्पादन के लिए मंजूरी दी जाती है। इसके अलावा, क्षतिग्रस्त अनाज, टूटे हुए चावल और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्न का भी इथेनॉल उत्पादन में उपयोग किया जाता है।

सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री जीवन योजना के तहत कृषि अवशेषों से दूसरी पीढ़ी (2जी) के इथेनॉल उत्पादन को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे खाद्यान्न पर निर्भरता और कम होगी।

एफसीआई चावल की हिस्सेदारी सीमित

सरकार के अनुसार, इथेनॉल उत्पादन में एफसीआई चावल की हिस्सेदारी पहले बेहद कम थी। इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2023-24 में इसका योगदान मात्र 0.02 प्रतिशत था, जो 2025-26 में बढ़कर 24.64 प्रतिशत हुआ। यह वृद्धि केवल इसलिए हुई क्योंकि खाद्य सुरक्षा की सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद अधिशेष चावल उपलब्ध था। वहीं, इसी अवधि में मक्का की हिस्सेदारी 42.6 प्रतिशत से घटकर 35.96 प्रतिशत रह गई।

वैश्विक तेल संकट में उपभोक्ताओं को राहत का दावा

सरकार ने कहा कि यदि पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण नहीं होता, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमत लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने के दौरान दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर हो सकती थी। हालांकि, इथेनॉल मिश्रण के कारण उपभोक्ताओं को 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल उपलब्ध हुआ और संकट के समय लगभग 30 रुपये प्रति लीटर तक की बचत हुई।

कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियां

सरकार के अनुसार, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम से अब तक:

1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।

316 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल के आयात का विकल्प तैयार हुआ।

950 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई।

किसानों और डिस्टिलरियों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया, जिससे कृषि उत्पादों के लिए स्थिर घरेलू बाजार विकसित हुआ।

सरकार ने कहा कि भारत अभी भी अपनी कुल तेल आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम केवल ईंधन लागत का मुद्दा नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और वैश्विक तेल कीमतों की अस्थिरता से देश को बचाने की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


प्रिय पाठकों एवं दर्शकों, प्रतिदिन भारत सरकार , दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय एवं दिल्ली राजनीति ,   दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली नगर निगम, NDMC, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की ताजा एवं बड़ी खबरें पढ़ने के लिए hindi.tennews.in : राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल को विजिट करते रहे एवं अपनी ई मेल सबमिट कर सब्सक्राइब भी करे। विडियो न्यूज़ देखने के लिए TEN NEWS NATIONAL यूट्यूब चैनल को भी ज़रूर सब्सक्राइब करे।

टेन न्यूज हिंदी | Ten News English | New Delhi News | Greater Noida News | NOIDA News | Yamuna Expressway News | Jewar News | NOIDA Airport News.


Discover more from टेन न्यूज हिंदी

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

टिप्पणियाँ बंद हैं।