राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम से बुनकरों को मिल रहा बड़ा सहारा, 237 हथकरघा उत्पादक कंपनियों का गठन

टेन न्यूज नेटवर्क

नई दिल्ली (28 जुलाई 2026): केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के तहत देशभर के हथकरघा बुनकरों को आधुनिक सुविधाएं, वित्तीय सहायता और बेहतर विपणन मंच उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस योजना के अंतर्गत उन्नत करघों, सहायक उपकरणों, वर्कशेड निर्माण, प्रकाश व्यवस्था, उत्पाद एवं डिजाइन विकास जैसी विभिन्न परियोजनाओं के लिए आवश्यकता आधारित वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

सरकार ने वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान 237 हथकरघा उत्पादक कंपनियों (Handloom Producer Companies – HPCs) का गठन किया है। इन कंपनियों का उद्देश्य हथकरघा बुनकरों को पेशेवर रूप से प्रबंधित, सदस्य-स्वामित्व वाले उद्यमों के रूप में संगठित करना और उनकी आय एवं बाजार तक पहुंच को मजबूत बनाना है।

राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के तहत संचालित रियायती ऋण/बुनकर मुद्रा योजना के माध्यम से बुनकरों और हथकरघा संस्थाओं को आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के अनुसार व्यक्तिगत हथकरघा बुनकर या उद्यमी को ऋण राशि का 20 प्रतिशत तक मार्जिन मनी, अधिकतम 25,000 रुपये तक दी जाती है। वहीं हथकरघा संगठनों को ऋण राशि का 20 प्रतिशत तक मार्जिन मनी, अधिकतम 20 लाख रुपये तक उपलब्ध कराई जाती है।

इसके अलावा हथकरघा संगठनों को 3 वर्ष की अवधि के लिए 6 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इस पर भारत सरकार द्वारा 7 प्रतिशत तक ब्याज सब्सिडी तथा क्रेडिट गारंटी शुल्क का भी प्रावधान किया गया है।

योजना के लाभ समय पर पहुंचाने के लिए पंजाब नेशनल बैंक के सहयोग से “हैंडलूम वीवर मुद्रा पोर्टल” विकसित किया गया है। इस ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से मार्जिन मनी सीधे लाभार्थियों के ऋण खाते में तथा ब्याज सब्सिडी संबंधित बैंकों को सीधे हस्तांतरित की जाती है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज बनी है।

योजना के तहत ऋण प्राप्त करने के लिए पात्र बुनकरों और श्रमिकों को भागीदार बैंक में आवेदन पत्र एवं आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं। आवेदक की पात्रता का सत्यापन और ऋण स्वीकृति संबंधित बैंक की जिम्मेदारी होती है।

हथकरघा उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर लगभग 1.50 लाख बुनकरों एवं हथकरघा संस्थाओं का पंजीकरण कराया है। साथ ही, प्रामाणिक एवं जीआई टैग वाले हथकरघा उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री के लिए इंडिया हैंडमेड (India Handmade) नामक समर्पित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। इस मंच पर वर्ष 2023-24 से 30 जून 2026 तक 5,413 बुनकर पंजीकृत हो चुके हैं।

सरकार का मानना है कि इन पहलों से हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, आसान वित्तीय सहायता और व्यापक बाजार उपलब्ध होगा, जिससे देशभर के लाखों बुनकरों की आजीविका को मजबूती मिलेगी।


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